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कोरोना: 85 लाख सुरक्षा गार्डों की नौकरी खतरे में

नई दिल्ली। कोरोना का अर्थव्यवस्था और रोजगार के मोर्च के पर असर दिखना शुरू हो गया है। जैसे-जैसे यह फैलता जा रहा है दुकानें, मॉल, शोरूम, थियेटर, होटल, स्कूल, कॉलेज बंद हो रहे हैं। इन कदमों से कोरोना को फैलने से तो जरूर रोका जा रहा है, लेकिन लाखों की संख्या में सुरक्षा गार्डों की नौकरी खतरे में आ गई है।
निजी सुरक्षा उद्योग से संबंधित संस्था कैप्सी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़े पैमाने पर सुरक्षा गार्डों की नौकरी जाने के मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है और सरकार से कहा कि वह इस महामारी से लड़ने में निजी गार्डों की भी नियुक्ति करे। केंद्रीय निजी सुरक्षा उद्योग संघ (कैप्सी) ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में उनसे लाखों निजी सुरक्षा गार्डों की आजीविका बचाने का आग्रह किया है, जिनकी नौकरी छूट रही है। देश में मॉल, शोरूम, थिएटर, होटल आदि के बंद होने से ऐसी स्थिति पैदा हुई है, जिसमें बड़ी संख्या में सुरक्षा गार्डों को हटाने के लिए कहा जा रहा है। इसके चलते जिन स्थानों पर कई गार्ड तैनात होते थे, वहां उनकी संख्या सिर्फ एक रह गई है। कॉप्सी के अध्यक्ष के विक्रम सिंह ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, उन्होंने (ग्राहकों) ने यह स्पष्ट किया है कि वे केवल बहुत कम गार्डों के लिए भुगतान करेंगे। अब दूसरों का क्या होगा? अन्य गार्ड कहां जाएंगे? इस दौरान उन्हें वेतन कौन देगा?
सिंह ने कहा कि कॉरपोरेट ने अपने प्रतिष्ठानों से कर्मचारियों की संख्या में भारी कमी के लिए कहा है और इस दौरान वेतन देने से भी इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वह कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई), भविष्य निधि (पीएफ) और वस्तु तथा सेवा कर (जीएसटी) विभागों को अपनी संग्रह की तारीखों को स्थगित करने का निर्देश दें, ताकि गार्डों को वेतन का भुगतान किया जा सके। भारत में इस समय 23,000 से अधिक निजी सुरक्षा एजेंसियां 85 लाख से अधिक सुरक्षा गार्डों को तैनात करती हैं।

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