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उमर अब्दुल्ला की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन से मांगा जवाब

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नैशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला को हिरासत में लिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया है। अब्दुल्ला की बहन सारा अब्दुल्ला पायलट ने लोक सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत अपने भाई उमर अब्दुल्ला की हिरासत को चुनौती दी थी।
कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को 2 मार्च तक अपना जवाब देने के लिए कहा है। हालांकि सारा अब्दुल्ला ने मामले पर तुरंत कोई फैसला देने का अनुरोध किया था जिसे कोर्ट ने नहीं माना। इस तरह उमर अब्दुल्ला फिलहाल 2 मार्च तक हिरासत में ही रहेंगे। सरकार ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर शिकंजा और कस दिया है। प्रशासन ने इन दोनों नेताओं पर जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) लगा दिया। पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से ही ये दोनों नेता नजरबंद चल रहे हैं। उमर के पिता और नैशनल कॉन्फ्रेंस चीफ फारूक अब्दुल्ला पहले से ही पीएसए के तहत बंद हैं।
जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) उन लोगों पर लगाया जा सकता है, जिन्हें सुरक्षा और शांति के लिए खतरा माना जाता हो। 1978 में शेख अब्दुल्ला ने इस कानून को लागू किया था। 2010 में इसमें संशोधन किया गया था, जिसके तहत बगैर ट्रायल के ही कम से कम 6 महीने तक जेल में रखा जा सकता है। राज्य सरकार चाहे तो इस अवधि को बढ़ाकर दो साल तक भी किया जा सकता है।

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