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अमेरिका के आगे कितना टिक पाएगा ईरान?

तेहरान/बगदाद। अपने सबसे ताकतवर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान ने आज अल सुबह अमेरिका के इराक स्थित सैन्य ठिकानों पर दर्जनों मिसाइलों से जोरदार पलटवार किया। ईरानी हमले के बाद पूरी दुनिया में भूचाल सा आ गया। इराक के आसमान में अमेरिकी लड़ाकू विमान चक्कर लगाने लगे। अमेरिकी नागरिक विमानों को ईरानी आकाश से गुजरने पर रोक लगा दी गई और तेल के दामों में उछाल आ गया। इस बीच अमेरिका ने बयान जारी कर कहा है कि उसे कोई नुकसान नहीं हुआ है लेकिन अभी भी पूरी दुनिया सुपर पावर अमेरिका और विश्व की 13 वीं सबसे बड़ी सैन्य ताकत ईरान से युद्ध की आशंका से सहमी हुई है जो कभी भी तीसरे विश्वयुद्ध में तब्दील हो सकता है।
मिसाइल हमले के बाद ईरान ने कहा कि उसने जनरल सुलेमानी की हत्या का बदला ले लिया है लेकिन अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की तो वह मुंहतोड़ जवाब देगा। उधर, ईरान के 52 ठिकानों पर हमला करने की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान ने 2 मिलिटरी बेस पर मिसाइल से हमला किया। सब ठीक है। हम नुकसान का आकलन कर रहे हैं। हमारे पास दुनिया की सबसे आधुनिक संसाधनों से लैस सेना है, कल सुबह दूंगा बयान। वर्ष 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों की मार झेल रहे ईरान ने 13.2 अरब डालर सेना पर खर्च किया। उधर, अमेरिका दुनिया में सबसे ज्यादा सेना पर खर्च करता है। स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रीसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक अमेरिका का सैन्य बजट 648.8 अरब डालर है। इस तरह अगर बजट के मामले में देखें तो ईरान अमेरिका के सामने कहीं नहीं ठहरता है। अमेरिका लंबे समय तक ईरान से युद्ध लड़ने में सक्षम है। अमेरिकी सरकार का अनुमान है कि ईरान के पास कुल 6 लाख सक्रिय सैनिक हैं। इनमें आर्मी, नेवी, एयर फोर्स और रिवॉलूशनरी गार्ड्स के जवान शामिल हैं। इसके अलावा उसके पास 5 लाख रिजर्व सैनिक भी हैं। दूसरी तरफ अमेरिका के पास करीब 13 लाख सैनिक हैं। इनमें से करीब 16-17 हजार सैनिक खाड़ी में तैनात हैं। अमेरिका के सैनिक इराक, कुवैत, यूएई समेत खाड़ी के कई देशों में तैनात हैं। अमेरिका ने हाल ही में 3500 अतिरिक्त सैनिकों को वहां भेजा है। अनुमान के मुताबिक ईरान के युद्धक टैंकों, रॉकेट प्रॉजेक्टरों, आॅटोमैटिक तोपों, बख्तरबंद गाड़ियों और युद्धक वाहनों की कुल संख्या 8,577 है। जबकि अमेरिका के मामले में यह संख्या 48,422 है। अगर हवाई ताकत की बात करें तो ईरान के पास कुल 512 युद्धक विमान और हेलिकॉप्टर हैं। अमेरिका के पास 10,000 से ज्यादा युद्धक विमान और हेलिकॉप्टर हैं। बात अगर समुद्री ताकत की करें तो ईरान के पास नवल शिप, पनडुब्बी, माइन वारफेयर आदि मिलाकर कुल संख्या 398 है। अमेरिका के लिए यह संख्या 415 है। ईरान के पास 34 सबमरीन, 88 पट्रोल वेसल, 3 माइन वारफेयर, 6 फ्रिगेट्स हैं। तनाव के बाद ईरान जलसीमा के पास अमेरिकी युद्धपोत पहुंच गए हैं जो टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों को दागने में सक्षम हैं।
परमाणु हथियारों के मामले में तो अमेरिका का ईरान से कोई तुलना ही नहीं है। दुनिया में कुल परमाणु हथियारों का 90 प्रतिशत तो सिर्फ अमेरिका और रूस के पास हैं। यूएस और रूस के पास करीब बराबर-बराबर परमाणु हथियार हैं। दूसरी तरफ ईरान 2006 से ही अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में दुनिया भर में कुल 13,865 परमाणु हथियार थे। इनमें से 3,750 परमाणु हथियार तैनात हैं जिसमें 2000 तो हाई आॅपरेशनल अलर्ट पर हैं। 2018 में अमेरिका के पास कुल 6450 परमाणु हथियार थे, जिनमें से 1,750 तैनात थे। ईरान के पास एक भी परमाणु हथियार नहीं हैं। हालांकि, माना जाता है कि उसने पाकिस्तान के कुख्यात परमाणु तस्कर अब्दुल कादिर के जरिए परमाणु क्षमता हासिल कर ली है। ईरान दुनिया के सबसे ज्यादा खतरा झेल रहे देशों में 5वें पायदान पर आता है और उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी मिसाइलें हैं। ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए मिसाइलों का ही इस्तेमाल किया। विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान कम दूरी से लेकर 2000 किमी तक मार करने में सक्षम मिसाइलें रखता है। ये मिसाइलें इजरायल लेकर दक्षिण पूर्व यूरोप तक तबाही ला सकती हैं। ईरान पर अब तक पश्चिमी देशों के आॅयल टैंकरों पर हमले के आरोप लगते रहे हैं लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि उसने मिसाइलों से हमला किया है।

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