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वोडाफोन ग्राहकों को चिंतित होना चाहिए?

नई दिल्ली। वोडाफोन ग्रुप के सीईओ निक रीड के यह कहने पर भारत में उनकी कंपनी का भविष्य अधर में लटका हुआ है, ग्राहकों में चिंता उपजने लगी है। उन्होंने लाइसेंस फी और स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज के तौर पर करीब 40 हजार करोड़ रुपये की देनदारी के संदर्भ में कहा कि कंपनी की स्थिति नाजुक है। अपन रीड ने सरकार से राहत नहीं मिलने पर भारत में अपने जॉइंट वेंचर को लेकर भी चेतावनी दी।
अंग्रेजी अखबार मिंट के मुताबिक, रीड ने यह भी कहा कि अगर इस देनदारी पर सरकार से राहत नहीं मिलेगी तो ब्रिटिश टेलिकॉम ग्रुप भारत में अपनी कंपनी बेच सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वोडाफोन के ग्राहकों के सामने सचमुच कोई परेशानी खड़ी हो सकती है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए कंपनी के ग्रुप सीईओ निक रीड के पूरे बयान को सही संदर्भ में देखना जरूरी है। रीड ने भारत में वोडाफोन की स्थिति पर कहा कि बड़ी मुश्किल घड़ी है। जब उनसे पूछा गया कि क्या रिलीफ पैकेज नहीं मिलने पर कंपनी के भारत में रहने का कोई तुक है, तो उन्होंने कहा कि सरकार ने कहा है कि वह भारत में इस क्षेत्र में किसी एक कंपनी का दबदबा नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि सरकारी नीतियों, अधिक टैक्स और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण टेलिकॉम कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है और भारत वोडाफोन के लिए लंबे समय से चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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