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महाराष्ट्र में सरकार गठन के बचे कुछ घंटे, बन रहे हैं सत्ता के 9 समीकरण

मुंबई। महाराष्ट्र में 2014 में गठित हुई विधानसभा का शनिवार को आखिरी दिन है, लेकिन अब तक नई सरकार के गठन को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। शिवसेना भले ही बीजेपी को धमकी दे रही है कि वह दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकती है, लेकिन उसने अब तक किसी भी दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ाया है। इसके अलावा बीजेपी भी अब तक सरकार गठन को लेकर पूरी तरह सक्रिय नहीं दिखी है। एक तरह से सूबे की सभी 4 प्रमुख पार्टियां बीजेपी, शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी सरकार गठन पर ठहरी हुई दिखती हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब गेंद पूरी तरह से शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे के पाले में है कि वह सरकार गठन के लिए बीजेपी से बात करते हैं या फिर एनसीपी-कांग्रेस को साधते हैं। हालांकि अब तक शिवसेना और बीजेपी के बीच किसी भी तरह की सहमति की बात सामने नहीं आई है। अब सरकार गठन के लिए महज तीन दिनों का ही वक्त बचा है, ऐसे में सत्ता के नौ समीकरण बनते दिख रहे हैं।

  1. पहला समीकरण यह है कि बीजेपी गवर्नर के पास सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सरकार बनाने का दावा पेश करे। इसके बाद वह अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों से समर्थन जुटाने की कोशिश करे, जैसा कि उसने कई अन्य राज्यों में पहले भी किया है। बीजेपी को 145 के जादुई समीकरण तक पहुंचने के लिए 40 विधायकों की जरूरत है, ऐसे में वह विपक्षी खेमे में ही सेंध लगा सकती है। ऐसा हुआ तो पहला टारगेट शिवसेना ही हो सकती है।
  2. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि किसी भी दल में विभाजन की स्थिति होना मुश्किल है क्योंकि ऐसा होने पर उन्हें अपने समर्थकों को जवाब देना होगा, जैसाकि हरियाणा में दुष्यंत चौटाला के बीजेपी से गठबंधन करने पर हुआ। अब जाट मतदाता उनसे बीजेपी संग जाने को लेकर सवाल पूछ रहे हैं।
  3. यदि सरकार गठन के लिए कोई भी पार्टी जरूरी नंबर नहीं जुटा पाती है तो ऐसे में राष्ट्रपति शासन लागू होगा, मुंबईकर जिसे दिल्ली का मुंबई पर शासन कहते रहे हैं। ऐसी स्थिति में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट करने की कोशिश में होंगी तो बीजेपी इस वक्त का इस्तेमाल शिवसेना या अन्य दलों को साधने के लिए कर सकेगी।
  4. यदि शिवसेना से बीजेपी कोई समझौता चाहती है तो उसे दिल्ली से ही प्रयास करने होंगे, लेकिन वह कौन होगा? शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अब तक पीएम नरेंद्र मोदी या फिर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से ही बातचीत पर अड़े हुए हैं। पहले कार्यकाल में शिवसेना को साथ रखने में सफल रहे देवेंद्र फडणवीस से अब वह बात करने के मूड में नहीं है। इसके अलावा हर दल में दोस्ती के लिए मशहूर नितिन गडकरी अब तक महाराष्ट्र में किनारे ही दिखे हैं। हालांकि अब भी वह एक अच्छे दूत साबित हो सकते हैं।

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  1. ปั้มไลค์

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