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कुछ लोगों को अभिव्यक्ति की पूरी आजादी-जस्टिस बोबडे

नई दिल्ली। देश के अगले मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे शरद अरविंद बोबडे ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर कहा है कि इसके दो पक्ष हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे लोग हैं, जो सार्वजनिक तौर पर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ भी कहकर बच निकलते हैं। इसके अलावा कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें अपनी अभिव्यक्ति के चलते हमलों का शिकार होना पड़ता है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से अगला मुख्य न्यायाधीश नामित होने के बाद बोबडे ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि यह विवाद स्पष्ट है। कुछ लोगों को अभिव्यक्ति की काफी आजादी है। ऐसा दौर कभी नहीं रहा, जब कुछ लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी का कोई दायरा तय रहा हो। उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ कुछ लोगों को बिना कहे ही समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नागपुर में जन्मे बोबडे ने ऐसे वक्त में चीफ जस्टिस की शपथ ली है, जब देश में संविधान में वर्णित अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस तेज है। संविधान के आर्टिकल 19 में नागरिकों को यह मूल अधिकार दिया गया है, जिसका पालन कराने में सुप्रीम कोर्ट ने आपातकाल के बाद से अब तक चार दशकों में अहम भूमिका अदा की है।
महिला जजों की कम संख्या को लेकर पूछे जाने पर जस्टिस बोबडे ने कहा कि मैं इस उद्देश्य से प्रयास करूंगा और बिना किसी पक्षपात के कोशिश करूंगा कि उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों का चयन बढ़े। लेकिन समस्या उनकी उपलब्धता की भी है। हाई कोर्ट में जज के तौर पर उनकी 45 वर्ष आयु होनी चाहिए। इसलिए हम रातों-रात संवैधानिक अदालतों में महिला जजों की संख्या नहीं बढ़ा सकते। यह सिस्टम के साथ ही होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला जजों की संख्या कम होने की वजह किसी तरह का पूर्वाग्रह नहीं है। उन्होंने कहा कि इसकी बड़ी वजह उनकी कम उपलब्धता रही है। इसके अलावा भी कुछ कारण हो सकते हैं। मौजूदा चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की ओर से हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और अन्य जजों की रिटायरमेंट उम्र को 65 साल तक करने के प्रस्ताव का उन्होंने समर्थन किया। फिलहाल यह उम्र सीमा 62 साल की है। उन्होंने कहा कि इससे सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए प्रतिस्पर्धा में कमी आएगी। इसके अलावा 62 साल की उम्र में कोई जज रिटायर होता तो यह एक तरह से उसके अनुभव का लाभ न लेने जैसा है। नागपुर में जन्मे जस्टिस शरद अरविंद बोबडे देश के 47वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर 18 नवंबर को शपथ लेंगे। उनका कार्यकाल 23 अप्रैल, 2021 तक होगा।

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  1. ปั้มไลค์

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