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डोरीलाल अग्रवाल स्मृति इंटर स्कूल हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता

सेंट पीटर्स ने दोनों वर्गों में मारी बाजी

सेंट एंथनी, सेंट कॉनरेड्स, सेंट पैट्रिक्स में हुआ था टाई

आगरा। 25वीं श्री डोरीलाल अग्रवाल स्मृति इंटर स्कूल हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता की टीम चैम्पियनशिप सेंट पीटर्स स्कूल ने जीत ली। इसके साथ ही इस प्रतियोगिता की दोनों श्रेणियों में सेंट पीटर्स स्कूल के छात्र ही अव्वल रहे। प्रतियोगिता का विषय था- ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भ्रष्टाचार की समाप्ति संभव है।’ विषय के पक्ष में सेंट पीटर्स कॉलेज के छात्र प्रणव महाजन ने अपने दमदार तर्क से श्रोताओं को प्रभावित किया, वहीं इसके विरोध में इसी कॉलेज कार्तिकेय दत्त गौतम काफी उम्दा विचार रखे।
वाद-विवाद प्रतियोगिता की शुरुआत सेंट एंथनी की छात्रा अंतरा कौशल के तर्कों के साथ हुई। वह प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रही, जबकि तीसरे स्थान पर सेंट कॉनरेड्स की अनुष्का पंडित रहीं। सांत्वना पुरस्कार सेंट पैट्रिक्स की अनंतिका कुमारिया को मिला। इससे पहले वाद-विवाद के बाद इन तीन प्रतिभागियों के बीच टाई हो गया। इन तीन प्रतिभागियों को फिर से तीन सेकंड का समय देकर उनसे पुन: विचार रखने को कहा गया। इसके आधार पर दूसरे, तीसरे और सांत्वना पुरस्कार के लिए प्रतिभागियों का चयन किया गया।
इस प्रतियोगिता में आगरा के दस स्कूलों के 20 छात्र-छात्राओं ने भागीदारी की। इनमें सेंट एंथनी की अंतरा कौशल, सेंट एंड्रयू की आन्वी अग्रवाल, सेंट पॉल्स की हिमान्या सिंह, आगरा पब्लिक स्कूल की नंदिनी बघेल, सेंट जॉर्जेज की अलीना, रागेन्द्र स्वरूप के धनंजय सिंह, सेंट पैट्रिक्स की अनंतिका कुमारिया, सेंट मैरी चर्च के यश कोठारी और सेंट पीटर्स के थे। इन सभी विद्यार्थियों ने विषय के पक्ष में अपने विचार रखे।
विषय के विपक्ष में विचार रखने वालों में सेंट एंथनी की खुशी रोहतगी, सेंट एंड्रयू के प्रखर गुप्ता, सेंट पॉल्स के जयदेव सिंह सलूजा, आगरा पब्लिक स्कूल के शुभम पाठक, सेंट कॉनरेड्स के लक्ष्य ठाकुर, सेंट जॉर्जेज देवेश सिंह, रागेंन्द्र स्वरूप की ऐश्वर्या, सेंट पैट्रिक्स की अविधा सिंह, सेंट मैरी चर्च की मनीषा गुर्जर और सेंट पीटर्स के कार्तिकेय दत्त गौतम थे।
प्रतियोगिता की शुरुआत प्रसिद्ध पत्रकार स्व. डोरीलाल अग्रवाल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। सेंट पीटर्स कॉलेज के प्राचार्य, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अशोक, डीएलए की ओर से हेमंत आनंद, निर्णायक मंडल में शामिल रहीं डीईआई की प्रोफेसर नमस्या और डॉ. कविता रायजादा ने स्व. डोरीलाल अग्रवाल के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और दीप प्रज्ज्वलित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ लीना लेजर ने किया।

हर व्यक्ति को कदम उठाना होगा

प्रतियोगिता में वाद-विवाद की शुरुआत सेंट एंथनी की अंतरा कौशल ने की। ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भ्रष्टाचार की समाप्ति संभव है’ विषय पर अपने विचार रखते हुए अंतरा ने साफ किया कि भ्रष्टाचार को खत्म करना संभव है और इसके लिए हर व्यक्ति को कदम उठाना होगा। अंतरा ने कहा कि केंद्र की सरकार की नीतियों के कारण भ्रष्टाचार में काफी कमी आई। इस संबंध में जीएसटी, डिजिटलीकरण और कालाधन को मिटाने जैसे कुछ मुद्दों की अंतरा ने चर्चा की।

झूठे सपने नहीं दिखाएं

वहीं अंतरा के तर्कों का विरोध करते हुए सेंट एंथनी की ही छात्रा खुशी रोहतगी ने कहा कि किसी को भी भ्रष्टाचार को खत्म करने को लेकर झूठे सपने नहीं दिखाने चाहिए। भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं हो सकता है। आज नैतिकता की दुहाई देकर सपने दिखाए जाते हैं। नीरव मोदी, विजय माल्य जैसे घोटालेबाजों की चर्चा करते हुए खुशी ने कहा कि इन लोगों को आज तक पकड़ा नहीं जा सका। नोटबंदी से भी कालाधन खत्म नहीं हुआ।

अंत:करण की शुद्धता जरूरी


‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भ्रष्टाचार की समाप्ति संभव है’ विषय की पक्ष में सेंट एंड्रयूज स्कूल की आन्वी अग्रवाल ने कहा कि यदि अंत:करण शुद्ध हो तो भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सकता है। आन्वी ने कहा कि भ्रष्टाचार परिवार के लोगों की बढ़ती महत्वाकांक्षा के कारण भी बढ़ता है। परिवार के लोग जब किसी चीज की फरमाइश करते हैं तो उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी माता-पिता पर होती है और कम आय की वजह से जब वे इसे पूरा नहीं कर पाते हैं तो वे भ्रष्टाचार को विवश होते हैं।

नोटबंदी का नहीं हुआ असर

वहीं सेंट एंड्रयूज के ही प्रखर गुप्ता ने ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भ्रष्टाचार की समाप्ति संभव है’ विषय के विरोध में कहा कि नोटबंदी से कालाधन को खत्म करने की बात कही गई थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इससे समाज के गरीब लोग परेशान हुए। अमीरों पर इस नोटबंदी का कुछ असर नहीं हुआ। अमीरों के धन में कोई कमी नहीं आई। भ्रष्टचार को खत्म करने की कोशिशों का सर्वाधिक असर गरीबों पर पड़ता है।

अपनी आत्मा में झांकना जरूरी

सेंट पॉल्स इंटर कॉलेज की हिमान्या सिंह ने विषय के पक्ष में अपने विचार रखे। हिमान्या ने कहा कि यदि हम सब अपने नजरिए बदल लें तो भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सकता है। भ्रष्टाचार निजी स्वार्थ के कारण पनपता है और मजबूत होता है। हम सब ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में हमें पहले अपनी आत्मा में झांकना होगा, दूसरों को कोसने से बात नहीं बनेगी। सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार को खत्म करने के प्रयास निरंतर जारी हैं।

भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हो सकता

सेंट पॉल्स इंटर कॉलेज के ही जयदेव सिंह सलूजा ने साफ किया कि भ्रष्टाचार को कभी समाप्त नहीं किया जा सकता है। यह जनमानस में है। हर कोई भ्रष्ट आचरण करता है। हर व्यक्ति अपना काम करवाने के लिए कोई न कोई भ्रष्ट रास्ता जरूर अख्तियार करता है। ट्रैफिक जांच में फंसने पर निकलने के लिए रिश्वत देना हो, राशन कार्ड बनवाना हो या इसी तरह के काम के लिए भ्रष्ट आचरण करना आम बात है।

गरीबी, बेरोजगारी से बढ़ता है भ्रष्टाचार

दिल्ली पब्लिक स्कूल की नंदिनी बघेल ने कहा कि आज सरकार की नई नीतियों के कारण भ्रष्टाचार में कमी आ रही है। पारदर्शिता के कारण राजनीतिक भ्रष्टाचार में कमी आई है। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए समाज के सभी व्यक्ति को सामने आना होगा। उन्होंने कहा कि गरीबी और बेरोजगारी के कारण भ्रष्टाचार पनपता है।

अंदर के देवता को जगाएं

सेंट कॉनरेड्स स्कूल की अनुष्का पंडित ने दमदार तर्क रखते हुए अपने अंदर के दैत्य को मार कर देवता को जगाने की वकालत की। अनुष्का का कहना था कि यदि ऐसा हर व्यक्ति कर सका तो भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है। इसी स्कूल के लक्ष्य ठाकुर ने कहा कि भ्रष्टाचार पर कभी लगाम नहीं लगाई जा सकती है।

समाज एकजुट होकर प्रयास करे

सेंट जॉर्जेज की अलीना ने पक्ष में अपनी बात रखते हुए कहा कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए समाज को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे। वहीं इसी स्कूल के देवेश सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार आजादी के 70 वर्षों बाद भी खत्म नहीं हो पाया और आगे भी इसके खत्म होने की संभावना नहीं है।

ईमानदारों को तो शांत कर दिया जाता है

रागेंद्र स्वरूप के धनंजय सिंह ने भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कुछ तर्क रखे लेकिन प्रश्नोत्तरी के दौर में वह उचित जवाब नहीं दे पाए। जबकि इसी स्कूल की ऐश्वर्या ने विपक्ष में बोलते हुए आज के कुछ भयावह विचार रखे। किस तरह से एक ईमानदार व्यक्ति को शांत कर दिया जाता है और भ्रष्टाचार फलता-फूलता रहता है, इस पर अपने तर्क दिए।

कर्तव्यनिष्ठा से काम करें

सेंट पैट्रिक्स की छात्रा अनंतिका कुमारिया ने विषय के पक्ष में मजबूत प्रस्तुति दी। अनंतिका ने कहा कि सभी व्यक्ति यदि कर्तव्यनिष्ठा से काम करें तो भ्रष्टाचार खत्म हो सकता है। दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे हासिल नहीं किया जा सकता है। दुनिया के कई देश भ्रष्टाचार से मुक्त हैं। फिर यह कहना कि भ्रष्टाचार से मुक्ति संभव नहीं है, गलत है।

कुछ देशों से भारत की तुलना ठीक नहीं

सेंट पैट्रिक्स की ही अविधा सिंह ने इसका विरोध करते हुए कहा कि दुनिया के कई देशों से भारत की तुलना उचित नहीं है। भारत में चाणक्य, गांधी जैसे लोगों ने भी इसे खत्म करने की बात कही थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। एक-दो लोगों के कहने से भ्रष्टाचार दूर नहीं हो सकता है।

भ्रष्टाचार एक वैचारिक बीमारी

सेंच मैरी चर्च स्कूल के यश कोठारी ने पक्ष में और मनीषा गुर्जर ने विपक्ष में अपनी बातें रखीं। मनीषा गुर्जर ने कहा कि भ्रष्टाचार एक वैचारिक बीमारी है। समाज इस बीमारी से पीड़ित है। हम हिंदू, मुस्लिम, ईसाई पैदा करते हैं, इंसान नहीं।

सभी कोशिश करें तो दूर होगा भ्रष्टाचार

सेंट पीटर्स के प्रणव महाजन ने विषय के पक्ष में अपनी बातें काफी दमदारी से रखीं। प्रणव ने कहा कि डेनमार्क, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, फिलीपींस जैसे कई देशों तक में भ्रष्टाचार नहीं है। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि भ्रष्टाचार को खत्म ही नहीं किया जा सकता है। चाणक्य ने भी भ्रष्टाचार को खत्म करने के कदम उठाए थे। यदि हम सब मिल कर कोशिश करें तो इसे खत्म करना संभव है।

अब तक के सभी प्रयास निरर्थक रहे

सेंट पीटर्स के ही कार्तिकेय दत्त गौतम ने विपक्ष में बोलते हुए कहा कि भ्रष्टाचार सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ा हो गया है। इसे खत्म करना असंभव है। हर जगह भ्रष्टाचार के सहारे ही लोग अपना काम करवाते हैं। भ्रष्टाचार को खत्म कौन करेगा। किसी भी एक या दो व्यक्ति के कहने मात्र से इसे खत्म करना आसान नहीं है। आजादी के 70 सालों से कई प्रयास किए गए गए लेकिन यह खत्म नहीं हो सका।

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