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गांवों में घुसने लगा चंबल नदी का पानी

  • कोटा बैराज से सुबह छोड़ा 6.80 लाख क्यूसेक पानी
  • काली नदी के पानी ने बढ़ा दी है परेशानी, अलर्ट जारी
  • पुलिस, प्रशासन और सिंचाई विभाग हो गया है मुस्तैद

नदी में जलस्तर ने छुआ खतरे का निशान

शहर से गुजरने वाली यमुना नदी की धारा सिकुड़ रही है तो वहीं पिनाहट में चंबल नदी ने खतरे का निशान छू लिया है। तटवर्तीय गांवों में पानी घुसना शुरू हो गया है। चंबल में काली नदी का पानी आने से परेशानी और बढ़ गयी है।
आज सुबह पिनाहट में चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान (132 मीटर) पर पहुंच गया था। राजस्थान के कोटा बैराज से 6,80,776 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। नदी का पानी बाढ़ का रूप लेने लगा था। प्रशासनिक अफसरों की मानें तो तटवर्ती गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भरने लगा था। लगभग एक दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा था। प्रशासन ने आधा दर्जन बाढ़ राहत चौकियां बनाकर निगरानी शुरू कर दी। गांव गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, क्योरी, बीच का पुरा, कछियारा, रेहा, झरनापुरा, उमरेठा आदि गांव के मार्ग जलमग्न हो गये। गोहरा और भटपुरा में प्रशासन द्वारा स्ट्रीमर से निगरानी करना शुरू कर दिया था। डॉक्टर की टीम मौके पर तैनात हैं। आधा दर्जन गांवों की बिजली काट दी गई है, जिससे गांवों में मुख्यालय से संपर्क टूट गया था। नदी में बढ़ता पानी ग्रामीणों में दहशत फैलाने लगा था। एसडीएम महेश प्रकाश गुप्ता ने सुबह पिनाहट घाट पर पहुंच गये। उन्होंने सिंचाई विभाग के एसडीओ से नदी की स्थिति की जानकारी ली। उन्हें बताया कि काली नदी का पानी और आ गया है। इससे चंबल में पानी की मात्रा बढ़ रही है। बता दें कि चंबल में आये उफान से दर्जनों गांवों के लोग भयभीत हैं।

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