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ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में हो रही जमकर लूट

  • बाबुओं और दलालों की चल रही है मनमर्जी, शक्ल देखकर काम करते हैं आरआई
  • दो तरह के हस्ताक्षर करने से भी लटके हुए तमाम लाइसेंस, अफसरों ने फेर रखीं नजरें
  • संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट के बाद आरटीओ कार्यालय में उमड़ रही लोगों की भीड़

आगरा। संभागीय परिवहन कार्यालय को भ्रष्टाचार के मामले में पहले से ही अव्वल नंबर पर माना जाता है, लेकिन संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट के बाद तो यहां के बाबुओं और बाहर बैठे दलालों ने गदर काट रखा है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से लेकर अन्य कामों में जमकर वसूली हो रही है। ये लोग दिन भर डीएल बनवाने के नाम पर लूट करने में लगे रहते हैं। खुद विभागीय बाबू आवेदकों से वसूली करते देखे जा सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि अधिकारी सब कुछ नजर आते हुए भी शांत बैठे हुए हैं।
संभागीय परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने का अधिकार आरआई सुधीर वर्मा के पास है। वह या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति टेस्ट ड्राइव लेता है। उसके बाद ही लाइसेंस जारी होता है। टेस्ट ड्राइव ही यहां वसूली का जरिया बना हुआ है। टेस्ट में फेल दिखाकर किसी का भी लाइसेंस रोका जा सकता है। टेस्ट में फेल होने का डर दिखाकर बाबू और बाहर बैठे दलाल वसूली करते हैं। वसूली का हिस्सा कार्यालय में लगे (आउटसोर्सिंग कंपनी) के युवकों के जरिये अधिकारियों के पास भी पहुंच जाता है। जो भेंट नहीं चढ़ा पाता है, वह भटकता ही रहता है।
संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट ने लोगों में यातायात नियमों के तोड़ने पर होने वाले भारी जुर्माने को लेकर डर पैदा कर दिया है। इसी वजह से लोगों की भीड़ संभागीय परिवहन विभाग कार्यालय पर टूट रही है। कोई ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए पहुंच रहा है तो कोई गाड़ी का प्रदूषण चेक कराने के लिए। इस एक्ट ने विभाग के साथ बाहर बैठे दलालों की भी चांदी कर रखी है।
आरआई सुधीर वर्मा की कार्यप्रणाली भी चर्चाओं में है। वह लाइसेंस के कागजातों पर दो तरह के साइन करते हैं। एक साइन तो आॅरिजनल हैं तो दूसरे डुप्लीकेट। डुप्लीकेट साइन दलाल तुरंत पहचान लेते हैं। डुप्लीकेट साइन में कई दिनों तक चक्कर काटने के बाद भी आवेदकों को लाइसेंस नहीं मिल पाता। ऐसे में वे मजबूरी में दलालों के पास पहुंच जाते हैं।
कुल मिलाकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में इन दिनों जमकर लूट हो रही है। कालिंदी विहार निवासी राकेश शर्मा डीएल बनवाने आए थे। उन्होंने बताया कि वह चार दिन से लगातार आ रहे हैं। कभी उनसे कह दिया जाता है कि सर्वर काम नहीं कर रहा है तो कभी कहा गया कि इस नंबर की कोई गाड़ी नहीं है। आरआई से साइन कराए लेकिन उस साइन से कुछ नहीं हुआ। उनके हस्ताक्षर को फर्जी बता दिया गया।

साइन होने पर टेस्ट नहीं देना होता
ड्राइविंग लाइसेंस की फीस जमा करने के बाद टेस्ट ड्राइव होती है। जो लोग इस प्रक्रिया से बचना चाहते हैं, उन्हें आरआई से हस्ताक्षर कराने पड़ते हैं। उनके साइन होते ही टेस्ट नहीं देना पड़ता। कई लोग अब तक सिफारिशों के जरिए साइन करा लेते थे, इसलिए आरआई सुधीर वर्मा ने आॅरिजनल और डुप्लीकेट साइन का तरीका निकाल लिया।

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