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सैंया से अपहृत बालक का शव बाजरे के खेत में मिला

-नौकर ने गला दबाकर की थी हत्या, निशानदेही पर शव हुआ बरामद
-इकलौते बेटे की मौत की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम
-शव को देखते ही बेहोश हो गई मां, लिपटकर रोने लगे पिता-बहन

आगरा/सैंया। सैंया पुलिस के लिए इससे बड़ी शर्म की बात क्या हो सकती है कि जिस बालक को ढूंढने में वह 12 दिन से लगी थी, उसका शव गांव में ही खेतों में पड़ा मिले। पुलिस कप्तान के निर्देश के बाद सीओ एक्शन मोड में आए, तो आरोपी नौकर को गिरफ्तार कर लिया। शव भी इस हालत में मिला कि परिजन बेटे का आखिरी बार चेहरा भी नहीं दे पाये। मां तो बेहोश हो गई। पिता शव से लिपटकर रोने लगे।
एक सितंबर को सैंया के रजपुरा गांव से शिक्षामित्र लोकेंद्र सिंह के पुत्र धनराज को पशुओं की देखभाल करने वाला नौकर इरदातनगर के वृतला गांव निवासी अनिल अपहरण करके ले गया था। वह मेला दिखाने के बहाने से बालक को लेकर चला गया था। परिजनों ने थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया था। तभी से पुलिस बालक की तलाश में जुटी हुई थी। कल तक जब बालक नहीं मिला, तो परिजन और ग्रामीण जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार और एसएसपी बबलू कुमार से मिले। एसएसपी ने सीओ खेरागढ़ प्रदीप कुमार को बालक को जल्द बरामद करने को कहा था। उसके बाद सीओ एक्शन मोड में आ गए। उन्होंने थाना प्रभारी को निर्देश दिए, तो देर रात पुलिस ने शमसाबाद क्षेत्र से नौकर अनिल कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने बालक की हत्या कर दी है। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने आज सुबह गांव के ही राजवीर के खेत से शव को बरामद कर लिया। बालक का शव क्षत विक्षत हो चुका था। काफी दिन पुराना होने के कारण शरीर गल चुका था। स्थिति यह थी कि चेहरा भी स्पष्ट नजर नहीं आ रहा था। मां तो शव देखते ही बेहोश हो गई। उसका पिता उस शव से लिपटकर रोने लगा। वह इकलौता बेटा था। दो बहनें भी उसकी याद में सुबक रही हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

मोबाइल तोड़ने से खाए था खुन्नस
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बालक की हत्या करने के पीछे जो वजह सामने आई वह चौंकाने वाली है। नौकर अनिल ने बताया कि हत्या से दो दिन पहले बालक ने उसका मोबाइल तोड़ दिया था। इस बात से वह उससे खुन्नस मान बैठा था, इसलिए उसने उसकी हत्या कर दी। वह उसे खेतों में ले गया फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर
दी।

यह तो पुलिस की घोर लापरवाही
यह तो पुलिस की घोर लापरवाही का उदाहरण है। एक सितंबर को गायब बालक का पुलिस सुराग नहीं लगा पा रही थी, जबकि उसकी बॉडी गांव में एक खेत में पड़ी थी। परिजनों ने एसएसपी बबलू कुमार से कल ही शिकायत की थी कि थाना पुलिस प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है। एसएसपी ने जब सख्त लहजे में सीओ को निर्देश दिए, तो कोतवाल ने रात में ही आरोपी को पकड़ लिया। इससे यह निष्कर्ष निकल रहा है कि अधिकारियों के कोप का भाजन न बन जाए, इस डर से थाना पुलिस ने कार्रवाई की और नौकर को पकड़ लिया। इतने दिनों से पुलिस लापरवाही बरत रही थी। अगर पुलिस पहले ही अलर्टनेस दिखाती, तो शव पहले ही बरामद हो सकता था।

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