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पेड़ काटने के लिये स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रक्रिया की मांग

एडीएफ ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जनहित याचिका

आगरा। आगरा डपलपमेन्ट फाउन्डेशन (एडीएफ) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए सरकारी योजना के लिये पेड़ काटने की अनुमति के लिये बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाने के स्थान पर न्यायालय द्वारा स्टैंडर्ड आॅपरेटिंग प्रक्रिया बनाये जाने की मांग की है। याचिका में सुझाव दिये गया है कि अनुमति किन शर्तों व प्रतिबन्धों के आधीन मिलेगी और किस सक्षम प्राधिकारी द्वारा दी जायेगी यह इस प्रक्रिया में तय होना चाहिये। ऐसा होता है तो टीटीजेड में सरकारी योजनाओं का तेजी से कार्यान्वयन हो सकेगा।
एडीएफ के सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गयी याचिका में कहा गया है कि सेन्ट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) की सिफारिशों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट योजनाओं में आने वाले वृक्षों को काटने की अनुमति प्रदान करता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट से अनुमति की प्रक्रिया में लम्बा समय लग जाता है जिससे योजनाओं के कार्यान्वयन में विलम्ब होता है व योजनाओं की लागत में भी वृद्धि होती है जबकि जनहित की ये योजनाएं जल्द पूरी होनी चाहिये।
याचिका में कहा गया है कि टीटीजेड में विगत नौ अगस्त को 1,16,56,105 पौधे लगाये गये जो एक कीर्तिमान था। ऐसी स्थिति में जनहित की योजनाओं के कार्यान्वयन के लिये यदि वृक्षों को काटने की अनुमति की वास्तव में आवश्यकता होती है तो उसके लिये सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिये क्योंकि पर्यावरण एवं विकास दोनों साथ-साथ चलने चाहिये। याचिका में पुराने वृक्षों को काटने की जगह ट्रान्स लोकेट कराने का सुझाव भी दिया गया है।
एडीएफ अध्यक्ष पूरन डावर का भी कहना है कि टीटीजेड के विकास के लिये इस प्रकार की प्रक्रियायें बननी चाहिये कि बिना देरी हुये विकास की योजनायें कार्यान्वित हों और पर्यावरण का हित भी सुरक्षित रहे।

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