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जेल में बंदी के सुसाइड पर ढेरों सवाल

  • डीआईजी जेल लव कुमार बोले- मामले की न्यायिक जांच कराएंगे, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
  • देर रात फारेंसिक टीम ने साक्ष्य किए संकलित, आज होगा शव को पोस्टमार्टम, अधिकारी भी पहुंचे

आगरा। सदर पुलिस द्वारा सौ-सौ के नकली नोट छापने के मामले में पांच दिन पूर्व जिला जेल भेजे गए पांच आरोपियों में से एक ओम प्रकाश झा द्वारा जेल परिसर में ही आत्महत्या करने की वजहें तो जांच के बाद ही सामने आएंगी, लेकिन एक सवाल यह उठ रहा है कि क्या ओम प्रकाश इस अपराध में वाकई संलिप्त था? यह सवाल इन चर्चाओं के बाद उठ रहा है कि मृतक ने कुछ बंदियों से कहा था कि वह गलत फंस गया है? एक बात यह भी पता चली है कि ओम प्रकाश पिछले तीन दिन से खाना नहीं खा रहा था। कल दोपहर में उसकी तबियत भी खराब हुई थी। जेल के डॉक्टर को दिखाने गया था, लेकिन बैरक में नहीं लौटा। जेल प्रशासन को रात दस बजे उसकी मौत की खबर मिल सकी।
इस मामले में समूचा जिला जेल सवालों के घेर में है। डीआईजी जेल लव कुमार ने भी शायद इसी को भांपकर मामले की न्यायिक जांच कराने की बात कही है। उनका यह भी कहना है कि जिसकी भी लापरवाही साबित होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर हरीपर्वत पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।
छह दिन पूर्व सदर पुलिस के साथ एसटीएफ की आगरा इकाई ने नकली नोट छापने और इन्हें खपाने वाले गैंग को पकड़ा था। पुलिस ने कुल पांच आरोपियों को जेल भेजा था। इन आरोपियों में एक राजपुर चुंगी निवासी ओमप्रकाश झा भी था, जिसने जेल के भीतर ही सुसाइड कर लिया है। उसने कितने बजे जान दी है, यह अभी जिला जेल प्रशासन नहीं बता पाया है। रात दस बजे गणना के समय ओम प्रकाश के न मिलने पर तलाश शुरू हुई। उसका शव जेल परिसर में ही एक पेड़ से लटका मिला। इसके बाद जिला जेल में खलबली मच गई। हरीपर्वत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही परिजनों को भी जानकारी दी। देर रात जेल में फिंगर प्रिंट यूनिट के साथ फारेंसिक टीम भी साक्ष्य संकलन के लिए पहुंच गई। देर रात तक छानबीन की गई। कई जगहों के फिंगर प्रिंट एकत्रित किए गए हैं। यह भी देखा गया कि कहीं कोई सुसाइड नोट तो न हीं है लेकिन ऐसा कुछ भी उसके पास नहीं मिला। वरिष्ठ अधिकारी भी जेल में रात को ही पहुंच गए थे।
जिला जेल के सूत्रों की मानें तो जेल आने के बाद से ही ओमप्रकाश परेशान था। उसने कुछ बंदियों से यह भी कहा कि वह तो इस खेल में गलत फंस गया। उसके तीन दिन से खाना न खाने के बाद भी जेल प्रशासन बेफिक्र रहा।
आज पुलिस फिर से अन्य बंदियों से जानकारी जुटाने के लिए जा सकती है। वहीं उसके साथियों से भी आज पूछताछ की जाएगी। पुलिस का कहना है कि यह भी हो सकता है कि जेल जाने के बाद आत्मग्लानि में उसने फांसी लगाई हो।

आखिर क्यों परेशान
था ओमप्रकाश झा?
नकली नोटों का आरोपी ओमप्रकाश झा आखिर जब से जेल गया तो वह क्यों परेशान था? यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही है। जेल सूत्रों की मानें तो एक रात तो वह सोया भी नहीं था। पूरी रात बैठा हुआ रोता रहा। उसकी मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उसे फर्जी फंसाया था। इस गैंग से उसका कोई लेना-देना नहीं है। वह इन लोगों को जानता तो है लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि ये लोग नकली नोटों का काम करते हैं। वहीं एसटीएफ ने दावा किया है कि उसके बारे में पुख्ता साक्ष्य संकलित होने के बाद ही कार्रवाई की गई थी। वह नकली नोटों के छापने वाले गैंग में शामिल था।

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