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नगर निगम, प्रशासन और वन विभाग में नहीं सामंजस्य: मेयर

  • कमिश्नर की अध्यक्षता में बने कमेटी, हर महीने हो समीक्षा
  • बाबू से लेकर पैरवी करने वाले तक रहे नजर, बढ़ाएं सख्ती
  • प्रशासन की जांच रिपोर्ट का इंतजार, दूसरे पक्षों से मांगे प्रूफ

मौजा घटवासन में निगम की जमीन पर कब्जे का मामला

मेयर नवीन जैन ने कहा है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की वजह नगर निगम, जिला प्रशासन और वन विभाग में आपसी सामंजस्य का न होना है। इस सामंजस्य के अभाव के कारण ही भू-माफिया सरकारी जमीनों को कब्जा रहे हैं। इसे रोकने के लिए जरूरत है उच्चस्तरीय कमेटी के गठन की।
मेयर का कहना है कि यह कमेटी कमिश्नर की अध्यक्षता में बने। हर महीने विभिन्न विभागों की जमीनों की समीक्षा। जब कमिश्नर स्वयं समीक्षा करेंगे तो मौके से लेकर न्यायालय तक की स्थिति स्पष्ट होती रहेगी। न्यायालय में पैरवी के कारण मुकद्मा हारना भी बंद हो जाएगा। वरिष्ठ अधिकारी की समीक्षा से विभाग के बाबू से लेकर न्यायालय में पैरवी करने वाले तक सख्ती रहेगी। किस विभाग का बाबू दूसरी पार्टी से मिला है, पैरवी करने वाला कहां लापरवाही बरत रहा है। जमीन पर कब्जा करवाने में किस अधिकारी-कर्मचारी की भूमिका रही है। इससे कब्जा करने और करवाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सके। सरकार भी सरकारी जमीनों को भू-माफियों से बचाने के लिए गंभीर और सख्त है।
उनका कहना है कि मौजा घटवासन में जिस जमीन पर अवैध कब्जे की बात सामने आयी है। ये मामला साल दो साल का नहीं बल्कि वर्षों पुराना है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पहले उसे देखें कि एक पक्षीय या दो पक्षीय। दूसरे पक्षों से जमीन के प्रूफ मांगे गये जाएंगे। कालोनाइजरों ने लोगों को धोखा दिया है। इसलिए सबसे पहले मुकद्मा दर्ज कराने का कार्य कोलोनाइजरों से मकान/जमीन खरीदने वालों को कराना चाहिए। जांच रिपोर्ट आने के बाद अपने स्तर से मामले की जांच कराएंगे। इन जमीनों पर जिन-जिन अधिकारियों-कर्मचारियों के समय में कब्जे हुए हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई करेंगे। न अधिकारी, न कर्मचारी और न कब्जा करने वाले बच पाएंगे।
शहर में अकेले नगर निगम की जमीन नहीं है। नगर निगम के अलावा जिला प्रशान और वन विभाग की भी है। खाली जमीन देखकर लोग निगम समझकर उसे कब्जा लेते हैं। नगर निगम की जमीनों की सुरक्षा करने के लिए उन्हें चिह्नित करने का कार्य किया जा रहा है। नगर निगम को तो विभिन्न कार्यों के लिए जमीन की जरूर है। वैसे सरकारी जमीन किसी भी विभाग की हो, उसे मुक्त तो कराना ही है। बता दें कि जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार द्वारा गठिन कमेटी ने मौजा घटवासन में सरकारी जमीन की जांच की तो पता चला कि नगर निगम की करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध कब्जे हो गये हैं। इसके बाद नगर निगम हरकत में आ गया है। मेयर ने इसे गंभीरता से लिया है। इस जमीन पर कालोनाइजरों ने भी बहुमंजिला बिल्डिंंगें खड़ी करके लोगों को बेच दी हैं। कोलोनाइजरों ने लोगों के साथ धोखाधड़ी की है। यदि नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है तो उसे खाली कराना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।

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