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वित्तीय अनियतिता में फंस सकते हैं नगर निगम के अधिकारी!

  • प्रमुख सचिव ने दिये अनुबंध का पुन: परीक्षण के निर्देश
  • नगर निगम द्वारा वित्तीय व्यय भार का नहीं होता प्रावधान
  • शहर में कूड़ा कलेक्शन का कार्य कर रही पांच हैं कपंनी

शहर में कूड़े का डोर-टू-डोर कलेक्शन करने वाली कंपनी और नगर निगम के बीच हुआ अनुबंध अफसरों के गले की फांस बन सकता है। शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। पुन: परीक्षण करके प्रतिबंधों के विपरीत कार्य होने की दिशा में वैधानिक कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं।
ज्ञातव्य है कि यहां पांच कंपनी/एजेंसी नगर निगम के वार्डों में कूड़े का डोर-टू-डोर कलेक्शन करती हैं। इन्हें अपने बिल का 40 प्रतिशत यूजर चार्ज के रूप में नगर निगम को धनराशि जमा करने और नगर निगम द्वारा 60 प्रतिशत का भुगतान कंपनी को करने का प्रावधान अनुबंध में किया गया है। अभी तक कोई कंपनी 40 प्रतिशत तक यूजर चार्ज वसूल नहीं पाई है। नगर निगम ने पिछले दिनों शत-प्रतिशत तक कंपनियों को भुगतान कर दिया गया था। जब हल्ला हुआ तो कंपनियों से कटौती करने की कवायद शुरू की गई।
इधर शासन ने इस तरह के अनुबंधों की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने पत्र के माध्यम से नगरायुक्त को निर्देश दिये हैं। सॉलिड वेस्ट प्रबंधन और डोर-टू-डोर कलेक्शन एवं ट्रांसपोर्टेशन वाले अनुबंध का स्वरूप बताया है। उन्होंने कहा कि जो संस्था निविदा में चयनित होगी वह अपने संशाधनों से उक्त कार्य को करेगी। संस्था इस कार्य के लिए यूजर चार्ज के रूप में प्राप्त होने वाली धनराशि से व्यय की प्रतिपूर्ति करेगी। निविदा में निकाय के स्तर से वित्तीय व्यय भार वहन करने का कोई प्रावधान नहीं रहता है। शासन के संज्ञान में आया है कि संस्थाओं को टिपिंग फीस एवं मासिक रूप में धनराशि देने का प्रावधान कर लिया गया है, जो वित्तीय अनुशासन के लिए बनाये गये नियमों के प्रतिकूल है। साथ ही वित्तीय अनियमितता भी है। अनुबंध को पुन: परीक्षण करने के निर्देश दिये हैं।

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