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न तो कोई नियम और न कोई प्रावधान, फिर क्यों मेहरबान?

  • विवि में एक अधीक्षक को दी गई अतिरिक्त वेतनवृद्धि से दूसरे अधीक्षक हैं आक्रोशित
  • 16 अधीक्षकों ने कुलसचिव को पत्र देकर खुद के लिए भी वेतनवृद्धि की मांग की

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में एक अधीक्षक पर विशेष कृपा बरसाई जा रही है। इनको एक वेतनवृद्धि अलग से दे दी गई है। इसके साथ ही उन्हें ओवरटाइम भी दिया जा रहा और अलग से पारिश्रमिक का भुगतान भी किया जा रहा है। इस वजह से विवि में वर्तमान में कार्य कर रहे 16 अधीक्षकों ने कुलसचिव से पत्र लिखकर पूछा है कि न तो कोई नियम है, न ही प्रावधान तो फिर क्यों हो एक व्यक्ति विशेष पर मेहरबान।
बता दें कि विवि में अधिकारी शासन और राजभवन से भी ऊपर हो गए हैं। यहां गलत काम भी बड़ी आसानी से कर दिए जाते हैं। विवि के 16 अधीक्षकों राजेश चोपड़ा, अखिलेश अग्रवाल, सीएस अस्थाना, रामजी लाल, एसएन सिंह, अमृत कुमार, रवि कुमार श्रीवास्तव, अजय कुलश्रेष्ठ, महावीर पाठक, भू प्रकाश, शैलेंद्र गुप्ता, विशंभर दयाल मित्तल, जीके जैन, नवीन माथुर, अमिता पांडे, अनूप कुमार श्रीवास्तव ने कुलसचिव केएन सिंह को पत्र लिखकर कहा है कि किसी व्यक्ति विशेष को उसकी कार्यक्षमताओं पर वेतन वृद्धि देने का न तो कोई शासनादेश है और न कोई नियम। अगर ऐसा कोई प्रावधान या नियम है तो हमें भी प्रवीन कुमार अग्रवाल की भांति भी यह पाने का अधिकार है। वर्तमान का कोई भी अधीक्षक प्रवीन कुमार अग्रवाल से काम में कम नहीं है। जहां तक देर रात तक कार्य करने की बात हैं तो वे सभी भी अपने पटलों पर देर रात तक कार्य करते हैं। लेकिन उन्हें न तो ओवरटाइम दिया जा रहा है न ही अलग से कोई पारिश्रमिक राशि। प्रवीन कुमार अग्रवाल को यह दोनों दी जा रही हैं। अधीक्षकों ने कहा है कि विवि प्रशासन साफ-साफ भेदभाव कर रहा है।

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