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ग्राम पंचायतों को सप्लाई देने वाली फर्मों पर बढ़ेगी सख्ती

  • अब बिना रजिस्ट्रेशन के नहीं दे सकेंगी सप्लाई
  • लेन-देन और मैटेरियल सप्लाई पर रहेगी नजर

योगी सरकार ने गांवों में होने विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाये रखने के लिए सख्ती को बढ़ा दिया है। ग्राम पंचायतों में डोंगल व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए अंतिम चेतावनी दी है, जिसके बाद इस दिशा में तेज से कार्य हो रहा है। ग्राम पंचायतों के बैंक खातों से भुगतान पर रोक लगी है। बिल्डिंग मैटेरियल की सप्लाई देने वाली फर्में भी सख्ती की दायरे में आयेंगी। आये दिन इन फर्मों पर ग्राम प्रधान और सचिव से मिलीभगत होने का आरोप लगता है। भुगतान के सापेक्ष पूरा मैटेरियल सप्लाई न देने की शिकायतें प्रशासन से लेकर शासन तक पहुंचती हैं।
जिले में 15 विकास खंड हैं, जिनमें 695 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें टेंडर के नाम पर खेल चल रहा है। प्रधान और सचिव की सांठ-गांठ से एक मनचाही फर्म को ही बिल्डिंग मैटेरियल की सप्लाई का टेंडर मिल जाता है। जिस फर्म को टेंडर मिलता है वही दूसरी फर्मों के कागजात लगा देती है। भुगतान के सापेक्ष फर्म द्वारा मौके पर पूरी सप्लाई नहीं दी जाती है। सूत्रों की मानें तो जो सप्लाई शॉट होती है उसकी जीएसटी फर्म को मिलती है और दर प्रधान और सचिव को।
जिला पंचायतराज अधिकारी ने बताया कि ग्राम प्रधान, सचिव ही नहीं सप्लाई देने वाली फर्मों की कार्यप्रणाली पर नजर रखी जाएगी। इसलिए सख्ती बढ़ रही है। अभी तक कोई फर्म किसी भी ग्राम पंचायत में कभी अपने बिल पेश कर देती थी। उसे भुगतान भी हो जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। आॅनलाइन व्यवस्था में उसी फर्म के बैंक खाते में भुगतान जाएगा, जिस संबंधित विकास खंड में रजिस्ट्रेशन होगा। समय-समय पर इनकी समीक्षा भी की जाएगी।

‘ग्राम पंचायतों में बिल्डिंग मैटेरियल की सप्लाई देने वाली फर्मों पर सख्ती होगी। बिना रजिस्ट्रेशन के कोई सप्लाई नहीं दे सकेगी। आॅनलाइन भुगतान की प्रकिया में रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। इससे उसके लेन-देन और मैटेरियल की सप्लाई पर नजर रहेगी। इस सख्ती से विकास कार्यों की गुणवत्ता में और सुधार आएगा।’

  • सुजाता प्रकाश, डीपीआरओ

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