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इसे ही तो कहते हैं विश्वासघात!

  • छत्ता थाने के एक सिपाही ने अपने तीन साथियों के नाम से फर्जी प्रार्थना पत्र देकर थाने से डायल 100 में भिजवा दिया
  • लखनऊ में तहकीकात करने के बाद तीनों सिपाहियों के सामने आ गई अपने ही साथी की करतूत, एसएसपी से की गई शिकायत

जब अपना ही कोई दुश्मनी निभाए तो बहुत दु:ख होता है। कुछ इसी तरह की पीड़ा छत्ता थाने के तीन सिपाहियों की है। तीनों का साथी सिपाही हर रोज उनके साथ उठता-बैठता था। खाना खाता था। हंसी-ठिठोली करता था। यही सिपाही इन तीनों को थाने से हटवाने की बड़ी चाल चल बैठा। इस सिपाही ने तीनों के नाम से 100 डायल में जाने के अनुरोध वाला एक प्रार्थना पत्र अधिकारियों के पास भेज दे दिया। तीनों का एक साथ तबादला हुआ तो वे चौंक उठे। तहकीकात की तो पता चला कि इन तीनों ने ही तो स्वेच्छा से 100 डायल में जाने को प्रार्थना पत्र दिया था। अब ये फर्जी प्रार्थना पत्र बताकर अपना तबादला निरस्त कराने को दौड़ लगा रहे हैं।
छत्ता थाने में तैनात तीन सिपाहियों के तबादले बीते दिनों 100 डायल में हो गए। इन सिपाहियों के नाम हैं सुघर सिंह, अजय और दीपेंद्र। इन तीनों सिपाहियों को समझ नहीं आया कि तीनों का तबादला एक साथ कैसे हो गया। एक सिपाही अजय का मन नहीं माना। वह जानकारी करने के लिए लखनऊ तक पहुंच गया। वहां जाकर जानकारी की तो पता चला कि उन तीनों के नाम से अलग-अलग प्रार्थना पत्र आए थे, जिसमें लिखा था कि वे स्वेच्छा से अपना तबादला 100 डायल में चाह रहे हैं। सिपाही अजय ने कहा कि उसने तो कोई प्रार्थना पत्र भेजा ही नहीं है। इसके बाद अजय ने अपने दो अन्य साथियों तबादले के बारे में जानकारी की तो उनके नाम से भी प्रार्थना पत्र देने की बात सामने आई। तीनों सिपाहियों के नाम से प्रार्थना पत्रों ही हैंड राइटिंग एक ही थी। सिपाहियों ने दिमाग लगाया तो सब कुछ सामने आ गया। दरअसल प्रार्थना पत्र जिस हैंडराइटिंग में थे, वह छत्ता थाने में तैनात बघेल नाम के एक सिपाही की है।
तीनों सिपाही गहराई में गए तो पता चला कि सिपाही बघेल का एक साथी लखनऊ में मुंशी है। उसी को तीनों के प्रार्थना पत्र देकर तबादले कराए गए हैं। सिपाही अजय कल एसएसपी बबलू कुमार से सिपाही बघेल की शिकायत करने पहुंचा और जांच कराकर कार्रवाई की मांग की।

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