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सपा नेता और पत्नी के पास और कोई चारा नहीं बचा था

  • बेगुनाही का सबूत दे रहे थे, लेकिन पुलिस सुनने को तैयार नहीं थी
  • लगातार तीन दबिशें दिए जाने के बाद आत्मघाती कदम उठा लिया
  • पत्नी देर रात हुई डिस्चार्ज, पति का अभी भी चल रहा उपचार

एक सपा नेता और उनकी पत्नी के जहर खा लेने की घटना के बाद एत्माउद्दौला थाने की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि पुलिस द्वारा दबिशें दिए जाने की वजह से इस दंपति ने यह कदम उठाया। यह दंपति अपने बेहगुनाह बता रहा था, लेकिन पुलिस एक नहीं सुन रही थी। ऐसे हालात में उन्होंने मौत को गले लगाने के इरादे से जहर खा लिया था।
बता दें कि पीलाखार निवासी विजेंद्र प्रजापति सपा नेता हैं। विजेंद्र और उनकी पत्नी मंजू देवी ने रविवार शाम को इसलिए जहर खा लिया क्योंकि पुलिस के तीन बार दबिश दी थी। इससे ये दहशत में आ गए थे। जहर खाने का कारण यह था कि यह दंपति पुलिस को खुद के निर्दोष होने का सबूत दे रहे थे लेकिन पुलिस एक नहीं सुन रही थी। माता-पिता ने बेटा विजेंद्र और उसकी पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया। देर रात मंजू देवी तो डिस्चार्ज हो गईं, जबकि विजेंद्र प्रजापति का अभी भी उपचार चल रहा है।
बेटे रितिक का आरोप है कि उनके पिता की छह अगस्त को तबियत खराब हुई थी तो उन्हें गोयल सिटी में उपचार को एडमिट कराया था। सात अगस्त की शाम को वह वहां से डिस्चार्ज हुए। इस बात की सीसीटीवी फुटेज भी है। इधर उनके पड़ोसी कोमल सिंह ने अपने बेटे के साथ मारपीट के मामले में रितिक, विजेंद्र प्रजापति और विजेंद्र के भाई संजय के खिलाफ थाने में तहरीर दे रखी थी। पुलिस ने इनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकद्मा दर्ज कर लिया। पुलिस ने विजेंद्र के घर जाकर दबिश देना शुरू कर दिया। इन्होंने पुलिस को बताया कि मामला झूठा है। वह गोयल हास्पिटल की सीसीटीवी भी देख सकते हैं, जिस समय घटना दिखाई गई है वह अस्पताल में थे, लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी। रितिक का कहना है कि इंस्पेक्टर एत्मादउददौला उदयवीर मलिक, एसएसआई अनुज मलिक और नुनिहाई चौकी पर तैनात दरोगा ने तीन बार दबिश देकर तीनों को इतना डरा धमका दिया गया कि उसके माता-पिता को जहर खाने को मजबूर होना पड़ा।
इधर विजेंद्र ने जहर खाने से पहले अपने घर पर बैनर भी टांगा, जिसमें लिखा कि सत्ता के दबाव में थाना एत्मादउददौला पुलिस द्वारा झूठे मुकद्मे में किए जा रहे उत्पीड़न के कारण परिवार आत्महत्या व मकान बेचने को विवश। वहीं उन्होंने आत्महत्या करने की बात फेसबुक पर भी पोस्ट कर दी थी।

इंसेट
दबिश का आरोप झूठा है। हमने कोई दबिश नहीं दी। दरोगाजी केवल नक्शा बनाने के गए थे। जिसने मुकद्मा दर्ज कराया है, वह भी उनके परिवार का ही है। पुलिस को विजेंद्र के परिवार ने यह बात भी नहीं बताई कि वह घटना वाले दिन अस्पताल में थे।

  • उदयवीर मलिक, इंसपेक्टर

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