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शीतगृह में आलू रख पछता रहे किसान

  • खुदाई के समय ही मिल रही थी कोल्डस्टोरेज से अच्छी कीमत
  • चार सौ रुपये प्रति पैकेट तक बिक रहा सबसे अच्छा आलू
  • लागत का मूल्य भी न मिलने से किसान रो रहे खून के आंसू
  • किसी ने बैंक तो किसी ने साहूकार से कर्ज लेकर की थी खेती

कृष्णवीर सिंह

आगरा। सरकार के लाख दावों के बावजूद आलू किसानों को उनकी फसल का बाजिव मूल्य नहीं मिल पा रहा है। जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर रही हैं। उचित मूल्य न मिलने से किसान अब आलू की फसल करने से कतराने लगे हैं। पिछले साल भी अंतिम दौर में किसानों का आलू कोल्डस्टोरेजों से चंद कीमत में बिका था। यही सोचकर किसानों की धड़कनें पल-पल बढ़ रही हैं।
बता दें कि अधिकतर किसानों का आलू अभी भी कोल्डस्टोरेजों में रखा हुआ है। उचित भाव न मिलने के चलते किसान आलू की निकासी नहीं कर पा रहे हैं। अभी आलू का भाव तीन सौ से लेकर चार सौ रुपये प्रति पैकेट है। इतनी कीमत में किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। वहीं जिन किसानों ने बैंक-साहूकार से कर्ज लेकर आलू की खेती की थी, उन पर दिन-रात ब्याज बढ़ती जा रही है। जिसके चलते किसान खून के आंसू रोने के लिए मजबूर है। आलू की फसल के लिए जो खेत पहले आठ हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से पट्टे पर उठते थे। वो ही खेत अब महज चार हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से पट्टे पर उठ रहे हैं। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आलू किसान किस दौर से गुजर रहा है।
एक कोल्डस्टोरेज के मुनीम ने बताया कि अभी तक आलू की निकासी महज 30-35 प्रतिशत तक ही हो सकी है। किसान कम भाव होने के चलते अभी अपना आलू नहीं बेचना चाहता है। उसे भाव बढ़ने का इंतजार है।
सैमरा निवासी किसान धर्मवीर सिंह ने बताया कि उन्हें तीन माह बाद अपनी बहन की शादी करनी है। इसलिए उन्होंने अपने पूरे आलू कोल्डस्टोरेज में रख दिए थे, लेकिन भाव सही न मिल पाने के चलते वह आलू बेच नहीं पा रहे हैं।
बास दल्ती निवासी किसान प्रेमपाल सिंह का कहना है कि खुदाई के समय ही आलू के भाव 500 रुपये प्रति पैकेट तक थे, लेकिन अब 400 रुपये का ही भाव है। इस कीमत में से ही कोल्डस्टोरेज का भाड़ा भी देना पड़ेगा। सब खर्च काटकर उनके हाथ में करीब 250 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से आ सकेंगे। जिसके चलते उन्होंने फिलहाल आलू बेचने का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दिया है। उन्हें कीमत बढ़ने का इंतजार है।
किसान खंदौली निवासी भूपेन्द्र चौहान का कहना है कि आलू का भाव उचित न मिलने के चलते उन्होंने इस बार आलू की खेती से तौबा कर ली है। वह इस बार अन्य फसलों को वरीयता देंगे।

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