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गोपनीय विभाग से बीएड के दो सत्रों के चार्ट हुए गायब!

  • चार्ट प्रभारी ने अवगत कराया है बीएड सत्र 2007, 2008 के चार्ट गायब, संदेह का विषय
  • चार्ट रूम में जो चार्ट हैं उनमें छात्रों के 70 से 80 प्रतिशत अंक, कैसे बनाए वह डिग्री
  • पूर्व में जारी हो चुकी है कई डिग्रियां इसके बाद तो उन पर भी सवाल हो गए हैं अब खड़े

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीएड के दो सत्रों के चार्ट गोपनीय विभाग से गायब हैं। चार्ट रूम प्रभारी ने इस बात का संदेह जताया है। इसके बाद यह मुद्दा परीक्षा नियंत्रक ने एजेंडे में परीक्षा समिति में रखा गया। लेकिन इतने बड़े मामले में भी कोई निर्णय नहीं लिया गया। मामले को टाल दिया गया। बैठक में न तो एफआईआर कराने की बात हुई न ही यह जानने की कोशिश की गई कि इस बात में कितनी सच्चाई है।
बता दें कि बीते दिनों दस अगस्त को परीक्षा समिति की बैठक हुई थी। परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार की ओर से एजेंडा में एक ऐसा बिंदु रखा गया कि वह हैरान कर देने वाला था। लेकिन परीक्षा समिति के सदस्य हैरान नहीं हुए। इससे पता चलता है कि बैठके सिर्फ खानापूर्ति को और अपने स्तर पर जो लाल-पीला करना है, महज इसके लिए हो रही है।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार ने एजेंडे में रखा था कि चार्ट रूम प्रभारी द्वारा अवगत कराया गया कि मूल उपाधि/अस्थाई उपाधि हेतु काफी संख्या में आवेदन प्राप्त हो रहे हैं जिसमें बीएड सत्र 2007 व 2008 के भी आवेदन पत्र है। छात्रों के सैद्धांतिक (थ्योरी में) 70 से 80 प्रतिशत अंक है। उक्त वर्ष के चार्ट गोपनीय विभाग में नहीं है। यह संदेह का विषय है। इधर दूसरे जो अंकचार्ट हैं उनमें किसी अधिकृत के हस्ताक्षर भी नहीं है न ही बार कोड अंकित है। अत: उपाधि किस आधार पर दी जाए?
इधर इन दोनों सत्रों के भारी तादाद में छात्रों की नौकरी भी लग गई है। पूर्व में वेरीफिकेशन होकर भी चले गए हैं। इसके बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनकी वेरीफिकेशन भी गलत होकर चली गई। अब 11, 12 साल बाद इस बात का हवाला दिया जा रहा है कि अंक चार्टों में नंबर ज्यादा है और गोपनीय विभाग के चार्ट गायब हैं। इस मामले में विवि की पीआरओ डॉ. गिरजाशंकर शर्मा से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनका फोन नहीं उठा।

इसका मतलब दूसरा चार्ट फर्जी?
आगरा। जिस प्रकार से चार्ट रूम प्रभारी ने संदेह जताया है कि गोपनीय विभाग से चार्ट गायब है तो उसका मतलब यह निकल रहा है कि गोपनीय विभाग का चार्ट इसलिए गायब किया गया है जिससे दूसरे मौजूद चार्ट से मिलान होने पर नंबर बढ़ने की सच्चाई सामने नहीं आ सके। अब एक ही चार्ट विवि के पास है। इसी से विवि को डिग्री बनानी होगी, सत्यापन करने होंगे। अगर चार्ट गायब है तो विवि को तो मामले में एफआईआर कराई जानी चाहिए लेकिन विवि प्रशासन मामले को दाबे हुए हैं। इससे अधिकारियों की भी संलिप्ता नजर आ रही है। बता दें कि दो चार्ट बनते हैं। इनमें एक गोपनीय विभाग में रहता है दूसरा विभाग में। विभाग में चार्ट में अगर किसी रोल नंबर पर या अंकों पर संदेह होता है तो उसका गोपनीय विभाग वाले चार्ट से मिलान होता है लेकिन यह चार्ट गायब ही कर दिया जाए तो मिलान किससे होगा?

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