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ठगी से कमा चुके थे दो करोड़

जिस राज्य की जो नामी कं पनी होती थी, उसी में नौकरी का लालच देते थे

आईजी की साइबर क्राइम यूनिट के हाथ बड़ा गुडवर्क लगा है। इस टीम ने ऐसे ठगों को पकड़ा है, जिन्हें 11 साल से कोई नहीं पकड़ पाया। अगर ये नहीं पकडेÞ जाते तो न जाने कितने और लोगों को ठगी का शिकार बनाते। ये ठग यूपी को छोड़ दूसरे राज्यों में नौकरी दिलाने का लालच देकर ठगी करते थे, जिससे कि वहां शिकायत होने पर भी वहां से कोई जांच करने यहां तक नहीं आ पाए। ये ठग 11 साल में करीब 11 हजार लोगों से दो करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं।
आईजी ए सतीश गणेश ने बताया कि आइजी आॅफिस में मुम्बई के जोयल गोन्जनिलक्स की निवासी भूमि ने शिकायत की कि अखाबरों में महाराष्टÑ में नौकरी लगवाने का झांसा देकर यूपी के बैंक खातों में आॅनलाइन सिक्योरिटी मनी जमा कराई गई। इसके बाद नंबर ब्लॉक कर दिया गया। आईजी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपनी टीम को खुलासे को लगा दिया।
साइबर क्राइम यूनिट द्वारा सूचनाओं के आधार पर जो डिटेल प्राप्त की गयी, वह सभी फर्जी निकलीं। इस अपराध में शामिल अपराधी अत्यधिक शातिर निकले। उन्होंने सिम कार्ड से लेकर बैंक खातों तक के लिए फर्जी एवं कूटरचित अभिलेखों का प्रयोग किया था। इस प्रकार अपराधियों को चिह्नित करना उनके लिए एक कठिन चुनौती बन गई। टीम ने उन खातों की पहचान की, जिनमें अपराधियों के खाते से रकम का हस्तांतरण किया गया था। इनमें से अधिकांश विज्ञापन एजेंसियों के बैंक खाते थे, जिनमें पेटीएम व अन्य के माध्यम से भुगतान किया गया था। विज्ञापन निकलवाने के लिए आॅनलाइन सम्पर्क किया गया था तथा पहचान के रूप में फर्जी आधार कार्ड व अन्य अभिलेख स्कैन कर ई-मेल के माध्यम से दिए गए। ऐेसे ही कुछ दस्तावेजों के आधार पर पुलिस टीम द्वारा अपराधियों की पहचान की गई।
टीम द्वारा कस्बा बाह के मोहल्ला बिजौली से तीन लोगों को गिरफ्तार करने के साथ अपराध में प्रयोग की जा रही बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन व भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेजों के साथ-साथ दो नाजायज असलाह व कारतूस भी बरामद किये गये। जो लोग पकड़े गए हैं, उनमें मुकेश बाबू पुत्र वेदीराम निवासी प्रतापपुर थाना बाह, विजयकान्त पुत्र वेदी ाम निवासी बाह, कृष्णवीर उर्फ सप्पू पुत्र ताराचन्द निवासी ग्राम हीरा सिंह की ठार, थाना नगला सिंघी फिरोजाबाद शामिल हैं।
आईजी ने बताया कि इस घटना में प्रकाश मेंं आये अभियुक्त मुकेश बाबू व विजयकांत सगे भाई हैं। कृष्णवीर, अभियुक्त विजयकांत का सगा साला है। मुकेश की पत्नी कृष्णा उर्फ छोटी भी सक्रिय रूप से अपराध में लिप्त रही है। मुकेश बाबू ने यह अपराध करने का तरीका अपने सगे साले ग्राम दड़हेता गढ़वार, थाना जैतपुर निवासी इन्द्रपाल पुत्र रामपाल से लगभग 10-11 वर्ष पूर्व सीखा। इन्द्रपाल लम्बे समय से गुजरात, महाराष्टÑ, तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश व राजस्थान में विज्ञापन देकर ऐसे अपराध करता रहा है। वह अब भी इस अपराध में सक्रिय है। कस्बा पिनाहट में मकान बनाकर अपने एक अन्य अपराधी साथी मैक्सी व सहयोगियों के साथ अपराध कर रहा है। मुकेश का दूसरा साला भूरा भी अलग गैंग बनाकर इसी प्रकार के अपराध कर रहा है।
बताया जा रहा है कि मुकेश जैसा बंगला पूरे बाह तहसील में किसी का नहीं है। गांव के लोग भी सोचते थे कि उस पर पैसा कहां से आ रहा है। पुलिस भी उसके बंगले को देख्कार चौंक गई। मुके श और उसका भाई हाईस्कूल तक ही पढेÞ हैं। इसके अलावा सामने आया है कि वह जिस राज्य में नौकरी दिलाने का विज्ञापन निकलवाते थे, वहां की प्रसिद्ध कंपनी में नौकरी दिलवाने का दावा भरते थे। महाराष्ट में वोडोफोन, तमिलनाडु में टाटा, राजस्थान में आरसेलर मित्तल, गुजरात में अडानी आदि में नौकरी का झांसा देते थे। इन कंपनियों के नाम देख लोग उनके जाल में फंस जाते थे। यह उनसे आॅनलाइन सिक्योरिटी मनी ले लेते थे और उसे रिफंड करने की बात भी कहते थे। पैसे मिलते ही उसका नंबर ब्लॉक कर देते थे।

सिम कार्ड को बनवाया फर्जी आधार कार्ड
आगरा। मुकेश बाबू व अन्य से पूछताछ में पता चला कि मुकेश ने अंकू पाल पुत्र भोलेबाबा, रमेश पाल निवासी राजनगर कालोनी, यमुना ब्रिज शाहदरा, थाना एत्मादउददौला के नाम से अपना आधार कार्ड बनवा रखा है, जबकि उक्त पते का कोई मौजूद ही नहीं है। अभियुक्त द्वारा अपराध के लिए इसी पते का आधार कार्ड प्रयोग कर विभिन्न मोबाइल कम्पनियोंं के सिम कार्ड व मोबाइल वॉलेट पंजीकृत कराया गया, जिससे कि पुलिस द्वारा पता फर्जी होने के कारण उनका पता न लगाया जा सके।

पत्राकारिता की आड़ में कर रहा था गलत काम
आगरा। आईजी ने बताया कि मुकेश बाबू से पुष्प सवेरा अखबार के संवाददाता का परिचय पत्र एवं एक हजार की संख्या में विजिटिंग कार्ड बरामद हुए हैं। वह तहसील बाह क्षेत्र में उक्त अखबार का स्थानीय डिस्टीब्यूटर भी रहा है। नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी के अपराध के साथ-साथ वह अपने आपको पुलिस से बचाये रखने को अखबार का सहारा लेता था।

इस टीम की रही मेहनत
आगरा। इस गैंग का पर्दाफाश करने वाली टीम में तेजतर्रार निरीक्षक शैलेश कुमार सिंह, उप निरीक्षक विनय भारद्धाज, एएसआईएम विशाल शर्मा, मुख्य आरक्षी देवेन्द्र पाल सिंह भदौरिया, इन्द्रदेव, जितेन्द्र कुमार, सुशील कुमार, नवीन प्रताप सिंह, आरक्षी चालक श्यामवीर सिंह शामिल हैं। 25 हजार रुपये की राशि से आईजी ने टीम को पुरस्कृत किया है।

  • मुकेश जैसा बंगला तो पूरी बाह तहसील में किसी का भी नहीं
  • दूसरे राज्यों में ही करते थे ठगी जिससे कि पकड़े न जा सकें

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