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पार्षद की डिमांड कइयों के लिए बन सकती है आफत!

  • एडीए-जल संस्थान में बिल्डिंग की चर्चाएं शुरू
  • हरकत में आये अधिकारी, दस्तावेजों की तलाश

बिल्डर से पार्षद की डिमांड का प्रकरण

बिल्डर की कमजोरी को अवसर मानकर भाजपा पार्षद ने फ्लैट की जो डिमांड की थी, वह कइयों के लिए आफत बन सकती है। एडीए और जल संस्थान में अधिकारी हरकत में आने लगे हैं। बिल्डिंग से जुड़े दस्तावेजों की तलाश हो रही है। बिल्डिंग की चर्चा से मामला तूल पकड़ रहा है। बिल्डिंग के अवैध निर्माण पर कार्रवाई हो सकती है।
भले ही बिल्डिर से फ्लैट की डिमांड करने वाले भाजपा पार्षद के खिलाफ संगठन ने कोई कदम नहीं उठाया हो, लेकिन फर्जीवाड़े की ‘जमीन’ पर खड़ी हो रही बिल्डिंग पर कार्रवाई के बादल मंडराने लगे हैं। सूत्रों की मानें तो पार्षद की डिमांड से अवैध बिल्डिंग को लेकर एनओसी एवं मानचित्र स्वीकृत करने वाले विभागों के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी बेफिक्र हो गये थे। वे समझ रहे थे कि पार्षद की डिमांड को लेकर बिल्डर मामले को सेट कर लेगा, फिर कोई शिकायत नहीं करेगा। बिना रोक-टोक के बिल्डिंग का निर्माण हो जाएगा और उनकी डिमांड भी पूरी हो जाएंगी। पार्षद की डिमांड तो पूरी नहीं हो सकी, लेकिन अवैध बिल्डिंग को संरक्षण देने वाले अन्य लोगों की कुछ डिमांड जरूर पूरी हो गर्इं। एनओसी और मानचित्र की कार्रवाई से जुडेÞ विभागीय लोग चर्चाओं का हिस्सा बन गये हैं। एडीए और जल संस्थान में इस अवैध बिल्डिंग को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं। जल संस्थान के महाप्रबंधक आरएस यादव ने एनओसी की जानकारी करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यदि बिल्डिंग को एनओसी देने में मानकों की अनदेखी की गई है तो कार्रवाई होगी। इधर एडीए में भी इस अवैध बिल्डिंग को लेकर हलचल शुरू हो गयी है। अधिकारी बिल्डिंग की हकीकत जानने में जुट गये हैं तो क्षेत्रीय अभियंता मामले से बचने की जुगत में लगे हैं। मामला बढ़ते देख उन्हें कार्रवाई का डर सताने लगा है। वहीं बिल्डर से डिमांड करने वाले पार्षद की भी बेचैनी बढ़ रही है।

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