आज की खबर आज
Agra

अवैध है बिल्डिंग, एडीए की शह

  • अभियंता की निगरानी में बन रही अवैध बिल्डिंग
  • एडीए में कंपाउडिंग नक्शा की पूरी नहीं है प्रक्रिया

बिल्डर से पार्षद की डिमांड का प्रकरण

सरकार का जोर भ्रष्टाचार को मिटाना है तो वहीं भ्रष्ट अफसरों का उसे बढ़ाना है। वे इसके लिए नियमों की कब्र तक बना डालते हैं। जिस भाजपा पार्षद ने बिल्डर से फर्जीवाड़े पर धूल डालने के लिए फ्लैट की डिमांड की वो निर्माण ही अवैध है। सवाल उठता है क्या एडीए सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को भाषणबाजी मान रहा है?
ज्ञातव्य है कि शहर की एक पॉश कॉलोनी में पार्षद ने बिल्डर से एक फ्लैट की डिमांड की, जिसका खुलासा आपके डीएलए अखबार ने किया। इस प्रकरण की चर्चा लगातार बढ़ रही है। पार्षद और बिल्डर को जानने के लिए लोगों में उत्सुकता है। सूत्रों की मानें तो पॉश कॉलोनी में बनने वाली इस बिल्डिंग में एक फ्लैट की कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है। इस बिल्डिंग का निर्माण अवैध बताया जा रहा है। एडीए के जिन अभियंताओं पर इसे रोकने का दायित्व है, वे स्वयं इस कार्य को करा रहे हैं। बिल्डर कैसे भी जल्द से जल्द बिल्डिंग को बेचने की फिराक में है। उसे डर है कि यदि कोई जांच शुरू हो गयी तो करोड़ों रुपये की बिल्डिंग फंस जाएगी। यदि एडीए ने जांच का डंडा चलाया तो बिल्डिंग पर सील लगने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तय मानी जा रही है। वहीं प्रशासन ने अपनी जांच शुरू कर दी तो बिल्डर पर फर्जीवाड़े को लेकर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। बिल्डर की कमजोरी इतनी बड़ी है कि वो पार्षद को दस लाख रुपये तक देना चाहता था, लेकिन पार्षद की डिमांड एक फ्लैट है।

सीएम से हो सकती है
भ्रष्टाचार की शिकायत

आगरा। पार्षद ने जिस बिल्डिंग में फ्लैट की डिमांड बिल्डर से की, वो अवैध है। कार्रवाई से बचने के लिए एडीए को चढ़ावा चढ़ाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो इस अवैध निर्माण की शिकायत मुख्यमंत्री से हो सकती है। कुछ लोग बैनामा से लेकर एडीए में नक्शा तक के कागजातों को इकट्ठा करने में लगे हैं। वे सबूतों के साथ एडीए के अफसरों की शिकायत करेंगे।

विवादों में रही जमीन

आगरा। जिस जमीन पर ये बिल्डिंग बन रही है वो विवादों में घिरी रही है। मामला न्यायालय तक पहुंच गया था। कुछ जमीन सरकारी भी बतायी जा रही है, जिसे इस बिल्डर ने अपने प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया है। जिन लोगों ने अडंÞगा डाला था उन्हें बिल्डर फ्लैट बनाकर दे रहा है, जिससे मामला दबा रहे और बिल्डिंग बनकर बिक जाये। ये निर्माण भी अवैध है, जिसका एडीए से नक्शा स्वीकृत नहीं है।

सीवरेज सिस्टम को
मुसीबत बनेंगे फ्लैट

आगरा। जल संस्थान में एनओसी की आड़ में जेब भरो का खेल चल रहा है, जो चरम पर है। बिना मौके पर जाये ही अधिकारी-कर्मचारी एनओसी की कार्यवाही पूरी करते हैं। चाहे सीवर लाइन उफने या बिल्डिंग में रहने वालों को पानी की सप्लाई न मिले, उन्हें तो एनओसी देकर अपनी जेब भरने से मतलब है। इस बिल्डिंग को भी इस खेल के तहत एनओसी दी गयी है। नियमों को ताक पर रखकर बिल्डर को एनओसी दी गयी है। जब इन फ्लैट्स में लोग रहना शुरू करेंगे तो सीवरेज सिस्टम पर लोड बढ़ जाएगा, जो किसी मुसीबत से कम नहीं होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *