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विवि रिजल्ट बनाने वाली एजेंसी के एमडी और मैनेजर को नोटिस

  • विवेचक बंगलुरू जाकर एजेंसी के मुख्यालय पर कर आए हैं नोटिस चस्पा
  • एमडी और मैनेजर के बयान को छोड़कर सभी के हो गए हैं केस में बयान
  • कई और नाम बढ़ेंगे अभी, विवेचक को कुछ और साक्ष्य भी मिल गए हैं

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दो पूर्व कुलपतियों सहित 19 लोगों के खिलाफ हरीपर्वत थाने में भ्रष्टाचार व अन्य गंभीर धाराओं में दर्ज मुकद्मे में आरोपित एजेंसी के जिम्मेदार लोगों के बयान अभी तक नहीं हुए हैं। विवेचक ने बंगलुरू में जाकर एजेंसी के दफ्तर पर नोटिस चस्पा कर दिया है। नोटिस में कहा गया है कि 24 जुलाई तक एमडी और मैनेजर बयान देने के लिए आगरा आ जाएं।
बता दें कि बीते साल चार सितंबर को हरीपर्वत थाने में विजिलेंस के इंसपेक्टर ने दो पूर्व कुलपतियों सहित 19 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार व वित्तीय अनिमितताओं सहित कई आरापों में मुकद्मा दर्ज कराया था। जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, उनमें पूर्व कुलपति प्रो. डीएन जौहर, पूर्व कुलपति मोहम्मद मुजम्मिल, पूर्व वित्ताधिकारी एसी सिंह, रामसागर पांडेय, रामपटल सिंह, पूर्व कुलसचिव वीके पांडेय, प्रभात रंजन, सहायक कुलसचिव अनिल शुक्ला, प्रो. भारती सिंह, डॉ. नीता चोपड़ा, डॉ. अनिल वर्मा, डॉ. वीपी सिंह, उप कुलसचिव महेंद्र कुमार, बालजी यादव, वेबमास्टर अनुज अवस्थी, डायरेक्टर राघव नारायण, माइंडलॉजिस्टिक लिमिटेड बंगलुरू के प्रोजेक्ट मैनेजर शैलेंद्र टंडन, मीनाक्षी मोहन और बालेश त्रिपाठी के नाम शामिल थे। इनमें से अधिकतर के बयान हो गए हैं। बयानों में तो सभी ने अपने को निर्दोष ही बताया है। एजेंसी माइंडलाजिक्स के एमडी और मैनेजर के बयान रह गए हैं। विवेचक इनके बयान लेने बंगलुरू गए थे, लेकिन एमडी और मैनेजर के वहां नहीं मिलने पर नोटिस चस्पा कर आए हैं कि 24 जुलाई तक वह अपने बयान देने आगरा आ जाएं। मैनेजर शैलेंद्र टंडन का तो फंसना तय माना जा रहा है। इन पर तो नंबर बढ़ाने के भी आरोप लगे थे।

ये धाराएं हैं केस में
आगरा। विवेचना पूरी होने के बाद चार्जशीट लगते ही गिरफ्तारी का दौर शुरू हो जाएगा। जिन धाराओं में मुकद्मा दर्ज हुआ था, उनमें आईपीसी 409, 420, 406, 120 बी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 (1) डीए 13(2) शामिल हैं। कुछ तो अभी से गिरफ्तारी पर स्टे ले आए हैं। इधर अभी विवेचना में कुछ नाम और बढ़ेंगे। विवेचक को कुछ साक्ष्य और मिले हैं, जिनमें अन्य लोग भी भ्रष्टाचार में शामिल पाए गए हैं। वर्तमान में विवि के दो अधिकारी भी एजेंसी के भुगतान में दोषी निकलकर आ रहे हैं। इनमें एक अधिकारी ने तो साफ-साफ लिखा है कि एजेंसी का भुगतान कर दिया जाए। इनके कहने पर ही भुगतान हुआ था जबकि एजेंसी ने रिजल्ट भी नहीं दिया था। इस अधिकारी का अब कार्यकाल कुछ ही दिन का बचा है, इसलिए यह घबराया हुआ है। इसके खिलाफ कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अखिलेश चौधरी ने भी मोर्चा खोल रखा है।

मनमर्जी से दिया गया था
माइंडलॉजिक्स को काम
आगरा। विजिलेंस की जांच में सामने आ रहा है कि बंगलुरू की माइंडलॉजिक्स एजेंसी को 2014 में सेमेस्टर का काम बिना निविदा के दे दिया गया था। इसके अलावा यह भी जांच में सामने आया कि वर्ष 2013 में जब एजेंसी से अनुबंध किया गया था तब अन्य एजेंसियां ऐसी थीं जिन्होंने इससे कम रेट के टेंडर डाले थे, इसके बाद भी माइंडलॉजिक्स पर मेहरबानी की गई।

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