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शुक्र है बैठक नहीं हुई, टल गया खूनी संग्राम!

सिर्फ दो वोटों ने महीनों की कसरत कर दी बेकार
बैठक शुरू होने से पहले ही हंगामा और तोड़फोड़

जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर छिड़ी जंग गत दिवस खूनी संघर्ष में तब्दील हो सकती थी। पिछले दिनों मेरठ में कमोबेश ऐसे ही हालात थे और एक प्रधान पुत्र को गोली मार दी गई थी। आगरा में कल जिला पंचायत कार्यालय पर ऐसे ही हालात नजर आए। बैठक शुरू होने से पहले ही हंगामा, तोड़फोड़ और गालीगलौज और नारेबाजी शुरू हो गई। पुलिस मूकदर्शक बनी रही और बाहरी तत्व नियम और कानून को ताक पर रखते हुए बेकाबू हो गए। हंगामा कर रहे लोग यह भी भूले गए कि बतौर पीठासीन अधिकारी उनके सामने सिविल जज शैलेंद्र कुमार वर्मा बैठे हुए हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर दो सांसदों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का कल फैसला होना था। सांसद कठेरिया समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश बघेल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल समर्थित यशपाल चौधरी को सदस्यों का कोरम पूरा करना था। सुबह साढ़े दस बजे बैठक शुरू होनी थी। यशपाल चौधरी अपने साथी सदस्यों को लेकर एसी बस से सुबह दस बजे ही जिला पंचायत कार्यालय में दाखिल हो गए। इस बीच एक दर्जन से अधिक बाहरी तत्व भी कार्यालय में प्रवेश कर गए और हंगामा शुरू हो गया। बिना बैठक के ही दोनों सांसदों की शक्ति का परीक्षण हो गया। देखते ही देखते जिला पंचायतय अध्यक्ष कुर्सी पर तख्ता पलट करने के लिए के लिए महीनों से चल रही कसरत पर पानी फिरने लगा। सिर्फ दो वोटों की वजह से पूरा खेल बिगाड़ा। शुक्र है बैठक नहीं हुई। कोरम पूरा होता तो बैठक होती और फिर चर्चा। इस बीच जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर दोनों पक्षों में खूनी संघर्ष भी हो सकता था। जब दूसरा पक्ष नहीं था, तब जिला पंचायत अध्यक्ष कार्यालय में हालात इतने नाजुक होने लगे थे। यदि दूसरा पक्ष होता तो दृश्य क्या होता यह सोचकर अमन पसंद लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं।

बाहरी तत्व कर गए प्रवेश,
पुलिस बनी रही मूकदर्शक

आगरा। सबसे बड़ा सवाल यह कि कल जब एसी बस से जिला पंचायत के सदस्य कार्यालय में प्रवेश कर रहे थे तब बाहरी तत्वों को प्रवेश करने से क्यों नहीं रोका गया। एक दर्जन से अधिक बाहरी तत्व बिना जांच पड़ताल के कार्यालय में कैसे प्रवेश कर गए। यदि बाहरी तत्व कार्यालय में प्रवेश नहीं कर पाते तो हंगामा नहीं होता। एक-दो सदस्यों का छोड़ दिया जाए तो हंगामा और तोड़फोड़ करने वाले सभी लोग जिला पंचायत के सदस्य न होकर बाहरी थे। इनमें से ज्यादातर लोग वे थे दूसरे दलों से जुड़े हैं और भाजपा तथा शासन की किरकरी करने के लिए पूरी प्लानिंग के साथ कार्यालय में दाखिल हुए। हद तो तब हो गई जब सिविल जज की मौजूदगी में लोग हंगामा और तोड़फोड़ कर रहे थे और पुलिस मूकदर्शक होकर खड़ी थी। सिविल जज की मौजूदगी की गरिमा को बनाए रखने के लिए पुलिस ने बाहरी तत्वों पर क्यों कार्रवाई नही की। इन सारे सवालों ने पुलिस और प्रशासन को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। पुलिस ने एक सदस्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और अब हंगामा करने वालों को चिह्नित कर रही है। जबकि मौके पर मौजूद पुलिस की आखों के आगे जब सब कुछ हो रहा था तब क्यों चुप खड़ी रही।

धमकी और बदतमीजी से
कई छोटे दिग्गज गुस्से में

आगरा। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर छिड़ी जंग से जनपद का माहौल खराब हो रहा है। पिछले दिनों एक सांसद ने खेरागढ़ क्षेत्र के एक भाजपा नेता हड़का दिया था। जब सांसद मौके से चले गए तो भाजपा नेता बुरी तरह बिफर पड़ा। सांसद के जाने के बाद जनता के बीच उसने सांसद के खिलाफ खूब जहर उगला। गुस्साए भाजपा नेता ने तो यहां तक कह दिया समय बदलने दो, वक्त एक जैसा नहीं रहता। इसी तरह आधा दर्जन छोटे दिग्गज जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर मिल रही धमकी और उनके साथ की जा रही बदतमीजी से नाराज हैं और ऐसे मौके की तलाश हैं जब उनके सितारे बुलंद हों और धमकी देने वाले जमीन पर।

अब हाईकोर्ट से तय
करेगा अगली बैठक

आगरा। हंगामा और तोड़फोड़ के चलते गत दिवस अविश्वास प्रस्ताव को लेकर होने वाली बैठक पीठासीन अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने स्थगित कर दी। इसकी रिपोर्ट उन्होंने जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार को भी दे दी है। जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार का कहना है कि मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया हैष अब आगे की बैठक हाईकोर्ट से ही तय होगी। कल हुए घटनाक्रम की रिपोर्ट भी हाईकोर्ट भेजी जाएगी।

धोखाधड़ी करने वालों
की हो रही है थू-थू

आगरा। जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर पिछले सवा दो महीने से जो रणनीति बन रही थी उसमें दो सदस्यों ने आखिरी वक्त में पाला बदल लिया। इन दोनों सदस्यों को कल जिला पंचायत कार्यालय पर यशपाल चौधरी के साथ पहुंचना था। उन्हें यशपाल चौधरी की सारी रणनीति की जानकारी थीष इन दो सदस्यों में से एक तो रणनीति का अगुआ भी बना हुआ था। सब कुछ तय हो चुका था लेकिन बैठक से महज 14 घंटे पहले रणनीति का अगुआ बना एक सदस्य पीठ दिखा गया। वह दूसरे पक्ष से जा मिला और विभीषण की भूमिका अदा करते हुए यशपाल चौधरी की रणनीति का सारा भेद दे दिया। यशपाल चौधरी के खेमे के लोग उसे लेकर थू-थू कर रहे हैं। कह रहे हैं जनपद की राजनीति में इससे ज्यादा गिरा हुआ दूसरा व्यक्ति शायद कोई और नहीं मिलेगा। दो महीने की मेहमान नवाजी के बाद भी वह भितरघात कर गया।

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