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बिजली दिन में होगी सस्ती, रात में महंगी

दिन में भी अलग-अलग समय के लिए अलग-अलग कीमत देनी होगी
लोड शेडिंग से बिजली काटी गई तो वितरण कंपनियों पर लगेगा जुर्माना
स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगेंगे, जितना पैसा जमा करेंगे, उतनी बिजली मिलेगी

नई दिल्ली। अब दिन में अलग-अलग समय के लिए बिजली की अलग-अलग कीमत देनी पड़ेगी। मोदी सरकार ने देश में बिजली के अलग-अलग आयामों पर नयी टैरिफ नीति का मसौदा तैयार कर लिया है। मसौदे के प्रस्ताव के मुताबिक अब दिन में जहां ग्राहकों को काफी सस्ती बिजली मिलेगी, वहीं रात यानि पीक आवर में बिजली की कीमत थोड़ी महंगी हो जाएगी। नई नीति में लोड शेडिंग के चलते बिजली जाने की हालत में वितरण कंपनियों पर जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव किया गया है। नई नीति को अगले कुछ दिनों में कैबिनेट से मंजूरी मिलने की संभावना है। तीन साल के भीतर देशभर के ग्राहकों के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा दिया जाएगा। प्रीपेड मीटर प्रीपेड मोबाइल की तरह काम करेगा। मतलब जितना पैसा उसमें भरवाएंगे, बिजली उतने दिन मिलती रहेगी। स्मार्ट मीटर से ग्राहकों को पता चलता रहेगा कि अभी मीटर में कितना पैसा बचा है। इसके अलावा ऐसी भी व्यवस्था होगी कि अगर कोई ट्रांसफॉर्मर या मीटर खराब होता है तो शिकायत मिलने के बाद उसे तय समयसीमा में ठीक किया जाए वरना जुर्माना लगेगा।
हर गांव और हर घर तक बिजली पहुंचाने के लक्ष्य के बाद मोदी सरकार अब देश में बिजली सेक्टर में आमूल चूल बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार का दावा है कि अब तक की नीतियों का फोकस जहां बिजली कंपनियों और बिजली वितरण कंपनियों तक होता था, वहीं नई प्रस्तावित नीति का फोकस आम ग्राहक पर होगा। इस नीति में कई ऐसे बिंदु जोड़े गए हैं, जिनसे ग्राहकों को फायदा होने वाला है। सरकार का आकलन है कि अगले तीन-चार सालों में नीति का असर पूरी तरह दिखने लगेगा और लोगों को 24 घंटे बिजली मिल पाएगी। दिन में जहां ग्राहकों को काफी सस्ती बिजली मिलेगी वही रात में थोड़ी महंगी बिजली मिलेगी। इसका मतलब यह हुआ कि अगर एक ग्राहक दिन और रात दोनों में एक समान बिजली का उपयोग करता है तो उसका बिजली बिल दिन और रात में अलग-अलग आएगा। सरकार की योजना है कि दिन में सभी राज्यों के वितरण कंपनियों को सौर ऊर्जा से पैदा हुई बिजली मुहैया कराई जाए जो काफी सस्ती होती हैं। नीति के मुताबिक राज्य बिजली वितरण कंपनियों को सौर ऊर्जा से पैदा हुई बिजली खरीदना अनिवार्य होगा। बिजली मंत्री आरके सिंह का अनुमान है कि आने वाले दिनों में सौर ऊर्जा से पैदा होने वाली बिजली की क्षमता बढ़कर करीब सवा लाख मेगावाट हो जाएगी जो दिन में सस्ती दरों पर ग्राहकों को बिजली देने के लिए पर्याप्त होगा।
नई नीति में इस बात का इंतजाम किया गया है कि अगर प्राकृतिक कारणों या किसी तकनीकी वजह के अलावा लोड शैडिंग होता है और बिजली जाती है तो बिजली वितरण कंपनियों को इसका हर्जाना भरना पड़ेगा। इतना ही नहीं कंपनियों को हर्जाना सीधे ग्राहकों के खातों में भेजना पड़ेगा।
बिजली मंत्री आरके सिंह ने दावा किया कहा कि अब देश में बिजली की कोई कमी नहीं है और इसलिए कोई भी वितरण कंपनी बिजली की कमी का बहाना बनाकर लोड शैडिंग नहीं कर पाएंगी। वैसे एक सवाल यह उठता है कि जब बिजली वितरण का अधिकार राज्य की वितरण कंपनियों के हाथ में है तो फिर केंद्र सरकार इन कठोर नियमों को कैसे लागू करवा पाएगी। लेकिन मोदी सरकार के मुताबिक इसका भी इंतजाम किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इलेक्ट्रिसिटी कानून में ही इस बात का प्रावधान है कि केंद्र का कानून लागू होगा। हालांकि राज्यों से भी लगातार बातचीत चली है और सभी राज्य सरकारें इसके लिए तैयार हैं।

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