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फिर सरकार से मोर्चा लेने की तैयारी में हैं ट्रांसपोर्टर

  • पश्चिमी बंगाल और महाराष्ट्र में आंदोलन शुरू
  • केंद्रीय संगठन पर भी चक्का जाम के लिये दबाव

आगरा। देशभर के ट्रांसपोर्टरों में सरकारी निर्णय को खिलाफ भारी आक्रोश है और वह सरकार से मोर्चा लेने के लिए एक बार फिर तैयारी कर रहे हैं।
पिछले साल ट्रांसपोटरर्््स की शीर्ष संस्था आॅल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने कई दिन देशव्यापी चक्का जाम किया था और सरकार के इस आश्वासन पर आंदोलन वापस लिया था कि छह माह में सभी मांगों पर गम्भीरतापूर्वक विचार किया जाएगा, परन्तु एक साल बीतने पर भी सरकार ने कोई भी मांग पूरी नहीं की। ऊपर से आम बजट में डीजल, पेट्रोलियम पदार्थों पर एक प्रतिशत ड्यूटी और एक प्रतिशत सेस ट्रांसपोर्टर्स पर और अधिक बोझ लाद दिया।
एआईएमटीसी के कार्यकारणी सदस्य व ट्रांसपोर्ट चैम्बर आगरा के अध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता का कहना है कि एक ओर ट्रांसपोर्टर्स डीजल की कीमतें घटाने ओर इसे जीएसटी में शामिल किए जाने, कीमतों की तिमाही समीक्षा तथा ट्रांसपोर्टर्स को जीएसटी से मुक्त करने जैसी मांगें सरकार से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पुरानी मांगों को पूरा करने की बजाय पेट्रोल-डीजल पर सेस ओर ड्यूटी बढ़ाकर ट्रांसपोर्टरों के साथ धोखा किया है।
ट्रांसपोर्टरों की पुरानी मांगों में टोल बैरियर खत्म करना शामिल था, लेकिन उसके स्थान पर अब कैश पेमेंट पर सरचार्ज और फास्ट टैग की अनिवार्यता भी थोपने की तैयारी हो रही है। वित्तीय संकट दूर करने के लिये थर्ड पार्टी प्रीमियम घटाने जैसे मुद्दों पर भी सरकार ने मुँह फेर लिया है।
गुप्ता के अनुसार, पश्चिमी बंगाल और महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्ट संगठनों ने सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने केंद्रीय संगठन एआईएमटीसी पर पर भी देशव्यापी चक्का जाम के लिए दबाव बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर की वित्तीय हालत बद से बदतर ही चुकी है। पिछली हड़ताल के बाद से इनपुट लागत 15 प्रतिशत बढ़ गयी है और अब नये कर और उपकर भी लाद दिए गए हैं। इस कारण आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।

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