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हर प्रत्याशी जीत को लगा रहा तिकड़म

  • विवि के 387 कर्मचारी करेंगे 15 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला
  • चुनावी रंग में डूबे सभी, सुबह से लेकर रात तक सिर्फ चुनावी चर्चाएं

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के परिसर इन दिनों कर्मचारी संघ चुनाव के रंग में डूबे हुए हैं। सुबह से शाम तक चुनावी चर्चाएं ही देखने और सुनने को मिल रही हैं। अब मतदान में तीन दिन रह गए हैं, इसलिए सभी प्रत्याशियों ने प्रचार को तेजी प्रदान कर दी है।
बता दें कि 15 जुलाई को कर्मचारी संघ का मतदान होना है। 387 कर्मचारी प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। इसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की संख्या भी 100 से 125 के बीच है, इसलिए यह भी चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। सभी प्रत्याशियों द्वारा अपनी-अपनी विशेषताएं गिनाकर वोट मांगे जा रहे हैं। अध्यक्ष व महामंत्री पर सबसे ज्यादा रोचक मुकाबला होने जा रहा है। अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अखिलेश चौधरी यह कहकर वोट मांग रहे हैं कि उन्होंने कर्मचारियों के लिए सदैव आवाज उठाई हैै। निलंबित कर्मचारियों को बहाल कराया है। कुलपति से वह अकेले मोर्चा लिए हुए हैं। कुलपति तो उनको चुनाव हराना चाहते हैं, इसके लिए उन्होंने अपने प्यादों को भी मैदान में उतारा है और अंदरखाने उनकी मदद कर रहे हैं। वे कर्मचारियों को भविष्य में मिलने वाली पेंशन को बचाने के लिए विवि में हो रहे निर्माण कार्यों की धांधलियों पर भी सवाल उठा रहे हैं, इसलिए कर्मचारी सोच समझकर मतदान करें। वही अध्यक्ष पद पर उनके लिए अच्छे प्रत्याशी हैं। दूसरे प्रत्याशी श्याम दीक्षित यह कहकर वोट मांग रहे हैं कि वह कर्मचारियों के साथ उनके सुख-दुख में हमेशा रहे हैं। अपनी जेब से उन्होंने कर्मचारियों की भलाई में पैसा खर्च किया है। तीसरे प्रत्याशी अनिल श्रीवास्तव यह कहकर वोट मांग रहे हैं कि वे कर्मचारियों के हित के लिए ही चुनाव लड़ रहे हैं।
महामंत्री पद के प्रत्याशी अरविंद गुप्ता यह कहकर वोट मांग रहे हैं कि जो प्रेम चार बार उन्हें कर्मचारियों का मिला, वह इस बार भी मिले जिससे कि वे उनके हितों की बाते अधिकारियों के समक्ष रख सकें। इनके सामने खड़े हुए संजय चौहान यह कहकर वोट मांग रहे हंै कि वह कर्मचारियों के लिए कुछ करना चाहते हैं। कर्मचारियों के अधिकार उन्हें दिलाना चाहते हैं। इधर प्रचार के दौरान कई बार ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि एक ही जगह पर एक ही पद के दो प्रत्याशी पहुंच जाते हैं। इसके बाद दोनों एक-दूसरे के मुंह को देखते हैं कि अब क्या कहें। चुनाव पूरे तरीके से रोचक दौर में पहुंच चुका है। बीती रात तो पार्टियों का दौर भी चला। दो प्रत्याशियों ने कर्मचारियों को जमकर शराब पिलवाई। कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं जो दोनों प्रत्याशियों की पी रहे हैं। इधर की बात उधर और उधर की बात इधर कर रहे। रणनीतियां इनके द्वारा लीक की जा रही है। प्रत्याशियों के साथ में चल रहे सलाहकारों को भी प्रत्याशी अपने पक्ष में लेने को पांसे फेंक रहे हैं। अपनी जीत को उनके द्वारा हर तिकड़म भिड़ाई जा रही है।

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