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किले के मुसम्मन बुर्ज और अमर सिंह गेट का संरक्षण

पांच-छह माह तक काम चलने के बाद दिखेगा नया लुक

आगरा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इन दिनों आगरा किले के मुसम्मन बुर्ज और अमर सिंह गेट को संवारने में जुटा है। यहां निकल चुके पच्चीकारी के पत्थरों को दोबारा लगाया जाएगा। खराब पैनल और टूटी जाली बदलने की योजना है। डिजाइन के पैनल बदलने के साथ छतरी की मरम्मत और खाई के फर्श को पक्का करने का काम भी होना है।
किले के मुसम्मन बुर्ज का प्रयोग मुगल बादशाहों द्वारा झरोखे के रूप में किया जाता था। यमुना किनारा की तरफ सर्वाधिक ऊंचाई पर बना यह भवन संगमरमर पर कीमती पत्थरों से की गई पच्चीकारी और कार्विंग के लिए अपनी अलग पहचान रखता है। मुगल बादशाह शाहजहां ने अपने बेटे औरंगजेब की कैद में अपनी जिंदगी के अंतिम आठ वर्ष यहीं गुजारे थे। यहां संगमरमर के कुछ पैनल खराब हो गए हैं। सामने का तोड़ा भी कोने से टूट चुका है। पच्चीकारी के पत्थर भी कई जगह से निकल गये हैं। ब्रिटिश काल में पच्चीकारी के पत्थरों की जगह पर मसाला भर दिया गया था। अब खराब पैनल बदले जायेंगे और पच्चीकारी के निकले पत्थर दोबारा लगेंगे। इस पर करीब 24 लाख रुपये का व्यय होगा। फिलहाल सुरक्षा कारणों से मुसम्मन बुर्ज में पर्यटकों का प्रवेश बंद है। एएसआई ने बुर्ज के आगे स्टील की रेलिंग लगा रखी है। इसे बाहर से ही देखा जा सकता है।
इसके अलावा पर्यटकों के मुख्य प्रवेशद्वार अमर सिंह गेट का भी संरक्षण किया जा रहा है। यहां भी पुराने डिजाइन पैनल की जगह नये पैनल लगाये जायेंगे। फर्श के कुछ पत्थरों को भी बदला जाएगा। लोना लगने की वजह से यह पत्थर खराब हो गये हैं। गेट के ऊपर बनी छतरी की सीलिंग के खराब पत्थरों को भी बदला जायेगा। गेट के नजदीक सूखी खाई में कुछ जगह कच्चा फर्श है, उसे पक्का किया जाएगा। इस कार्य पर करीब 50 लाख रुपये व्यय होने का अनुमान है। संरक्षण का काम पांच-छह माह तक चलेगा।

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