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अफसर नहीं, थानेदार बड़ा!

नो-एंट्री पर थाना पुलिस ने व्यापारियों को फुटबॉल बनाया

  • एस पी ट्रैफिक के वायदे पर भी नहीं मिली वाहनों को राहत
  • थाना प्रभारी बोले, बिना लिखित आदेश के अनुमति नहीं देंगे
  • नो-एंट्री का लिखित आदेश जारी करने से बच रहे अधिकारी

आगरा। नो-एंट्री के नये नियमों से फंसे व्यापारी पुलिस के बीच फुटबॉल बन गये हैं। पुलिस अधिकारियों के राहत के वायदे को थाना पुुलिस ने ठेंगा दिखा दिया है। थाना एत्माद्उद्दौला प्रभारी ने साफ कह दिया कि बिना लिखित आदेश के वह नो-एंट्री में राहत नहीं देंगे। परेशान व्यापारियों ने पुन: अधिकारियों से गुहार लगाई, तो उन्होंने आज से राहत दिलाने का पुन: लॉलीपॉप दे दिया। देखना है कि नया वायदा कितना कारगर होता है।
गौरतलब है कि पुलिस द्वारा लागू किये गये नये यातायात नियमों के कारण यमुना ब्रिज मालगोदाम पर भारी वाहनों की दिन में बिल्कुल आवाजाही नहीं हो पा रही है। व्यापारियों का करोड़ों रुपये का माल पिछले सोलह दिन से फंसा हुआ है। विगत चार जुलाई को जिलाधिकारी एनजी रविकुमार ने व्यापारियों को नई व्यवस्था खत्म करने और पुरानी व्यवस्था बहाल करने का आश्वासन दे दिया था। इस आश्वासन के क्रियान्वयन पर भी पुलिस अधिकारी चुप्पी साधे रहे। व्यापारियों के दबाव बढ़ाने पर छह दिन बाद एसपी ट्रैफिक प्रशांत कुमार ने व्यापारियों के साथ बैठक की और दिन में दो बार नो-एंट्री खोलने का आश्वासन दिया। उन्होंने अगले ही दिन इस बारे में एसएसपी से लिखित आदेश जारी कराने का आश्वासन दिया, लेकिन दो दिन बीतने के बाद भी यह आदेश जारी नहीं हुआ। अधिकारी व्यापारियों से कह रहे हैं कि वे दिन में 11 से एक बजे और तीन से चार बजे के बीच वाहनों को निकालना शुरू करें, उन्हें रोका नहीं जाएगा।
दूसरी ओर थाना प्रभारी एत्माद्उद्दौला उदयवीर सिंह मलिक ने व्यापारियों से पहले लिखित आदेश लाने को कह दिया है। उधर अधिकारी नो-एंट्री के दौरान संभावित हादसों की आशंका से लिखित में आदेश जारी करने से बच रहे हैं। फुटबॉल की तरह एक-दूसरे के पास दौड़ लगा रहे व्यापारियों ने एसपी ट्रैफिक से बात की तो उन्होंने कह दिया कि एसएसपी व्यस्तता के कारण लिखित आदेश जारी नहीं कर सके हैं। लेकिन व्यापारी वाहनों की आवाजाही शुरू करायें, उन्हें रोका नहीं जाएगा। लेकिन थाना प्रभारी लिखित आदेश लाने पर ही अड़े हैं।


करोड़ों का माल अटका
पिछले सोलह दिन से यमुना ब्रिज मालगोदाम पर सीमेंट, खाद, सोड़ा, नमक आदि का करोड़ों रुपये का माल अटका पड़ा है। बाजारों में माल का संकट खड़ा हो गया है। पुराना माल न उठ पाने के कारण व्यापारी नया माल भी नहीं मंगा पा रहे हैं। व्यापार न चलने से ने केवल व्यापारियों बल्कि रेलवो को भी लाखों रुपये रोज का घाटा हो रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि थाना पुलिस निजी स्वार्थ के चलते व्यापारियों को परेशान कर रही है।

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