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मंटोला में अब चप्पे-चप्पे पर खाकी

  • साइबर सेल और पुलिस सोशल मीडिया पर भी रख रही नजर
  • आज सुबह शांति थी, खुला बाजार, खुफिया विभाग भी सजग

मंटोला क्षेत्र में सोमवार को हुए बवाल के बाद पुलिस सजग है। मंटोला के अलावा मिश्रित आबादी वाले दूसरे क्षेत्र भी छावनी में तब्दील हो गए हैं। देहात के थानों से भी पुलिस को शहर में बुला लिया गया है। चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। कल की घटना में फेल हुआ खुफिया विभाग भी हर गतिविधि पर अब नजर बनाए हुए है।
बता दें कि आगरा में मंटोला, नाई की मंडी, हरीपर्वत का वजीरपुरा, शाहगंज, एत्मादउददौला का पीलाखार, टेढ़ी बगिया, लोहामंडी, कोतवाली और ताजगंज संवेदनशील इलाके हैं। इन सभी इलाकों पर पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है। यहां दंगा नियंत्रण स्कीम लागू कर दी गई है। शहर को 40 सेक्टरों में बांटा गया है। हर प्वाइंट पर एक दरोगा और दस सिपाही लगाए गए हैं। देहात और शहर के थानों का पूरा फोर्स इन्हीं इलाकों में देखा जा रहा है। दूसरी ओर प्रभारी जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मादड़ ने मजिस्ट्रेटों की तैनाती कर उनसे सीओ के संपर्क में रहने को कहा है। असामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मंटोला में हुए बवाल के बाद पुलिस और साइबर सेल सोशल मीडिया पर भी नजर रखे हुए है। कहीं कोई दोबारा मामले को सुलगाने की कोशिश तो नहीं कर रहा, यह देखा जा रहा है। सीओ छत्ता रितेश कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस पूरे तरीके से चौकन्ना है। मंटोला में भारी तादाद में फोर्स लगाया गया है। दो बटालिन पीएसी तैनात की गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी को प्रयास किए जा रहे हैं। इधर मंटोला क्षेत्र के बाजार आज सुबह खुल गए।

कोतवाल को पता ही नहीं चला
कि क्षेत्र में क्या होने वाला था?
आगरा। सोमवार को हुए बवाल में इंसपेक्टर मंटोला की भी भूमिका लापरवाहीपूर्ण रही। वह कई महीने से क्षेत्र के कोतवाल हैं और लोगों के बीच में अपना नेटवर्क ही नहीं बना पाए। अगर अपने मुखबिर बनाए होते तो पहले ही उन्हें पता चल जाता कि क्या होने जा रहा है। थाने के पास ही बवाल हुआ। इससे उपद्रवियों के हौसले पता चलते हैं कि वह क्या सोच बनाए हुए थे। यह तो अच्छा है कि चंद मिनटों में अतिरिक्त फोर्स पहुंच गया, अन्यथा बड़ा बवाल होने की पूरी संभावना थी। थाना पुलिस की निष्क्रियता भी बड़े पैमाने पर सामने आई है।
बेहद संवेदनशील है मंटोला
आगरा। मंटोला बेहद संवेदनशील थाना है। यहां पूर्व में भी क ई बार बवाल हुए हैं। एक बार तो वर्ष 2007 में एसएसपी को भीड़ ने दौड़ा लिया था। सदैव देखा गया है कि पुलिस का नेटवर्क जब-जब हल्का पड़ा है, यहां बवाल ने विकराल रूप लिया है। इसलिए यहां तेजतर्रार इंसपेक्टर की तैनाती होनी चाहिए।

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