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पहले से ही बनाकर बैठे थे बवाल की रणनीति

  • थाने के 100 मीटर दूरी पर जमकर दिखाया दुस्साहस
  • सदर भट्ठी चौराहे पर भी सुरक्षा के लिए नहीं थी पुलिस

सोमवार को जिस तरीके से मुस्लिम लोगों ने बवाल किया, ऐसा लग रहा है कि उसकी रणनीति पहले ही बना ली गई थी। वह तो समय पर पुलिस एक्शन में आ गई, नहीं तो मंटोला के साथ पूरी ताजनगरी सुलग सकती थी।
बता दें कि सोमवार सुबह दस बजे जामा मस्जिद पर मॉब लिचिंग की घटनाओं के विरोध में मुस्लिम लोग भारी तादाद में एक जुट हुए। इनकी संख्या करीब 500 के आसपास थी। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि बवाल की रणनीति एक-दो दिन पहले ही बना ली गई थी। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एक समय पर एकजुट होना इसी तरफ इशारा करता है। पुलिस बवालियों के इरादे भांपने में नाकामयाब रही। एलआईयू भी कुछ भी पता नहीं कर सकी, जबकि एक दिन पूर्व ही मेरठ में हुई घटना के बाद सभी को चौकन्ना रहने की आवश्यकता थी।
सुबह दस बजे जामा मस्जिद पर लोग एकजुट हुए। यहां से जुलूस के रूप में आगे बढ़े। सिटी मजिस्ट्रेट ने यहीं उनका ज्ञापन ले लिया, लेकिन प्रदर्शनकारी जिद पर अड़े थे कि वह कलक्ट्रेट में जाकर ही ज्ञापन देंगे। ज्ञापन वहीं लिए जाने के विरोध में कई युवक आ गए और तेजी से आगे बढ़ने लगे। पुलिस इसके बाद भी चौकन्नी नहीं हुई।

जुलूस में शामिल लोग सदर भट्ठी पर श्यामू हलवाई की दुकान पर सबसे पहले पहुंचे। यहां काम कर रहे युवक से कहा कि दुकान बंद करो। युवक ने जब मना किया, तो वह दुकान का सामान फेंकने लगे। इसके बाद उन्होंने पत्थर फेंककर बवाल शुरू कर दिया। श्यामू हलवाई के सामने पान की दुकान है। बलवाइयों ने दुकान बंद करने की कहीं। उनके भी मना करने पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। आसपास के दुकानदारों को भी धमकाने के साथ तोड़फोड़ शुरू कर दी गई। दुकानदारों का आरोप है कि गल्ले लूटे गए। थाने से सौ मीटर की दूरी पर यह बवाल हुआ। इस दौरान एक कारखाने को भी बंद कराने का प्रयास किया गया।

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