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स्पेक्ट्रम की नीलामी से छह लाख करोड़ जुटाएगा केन्द्र

ढांचागत आधार कार्यों को गति देने का फैसला
सरकार कोई भी स्पेक्ट्रम नहीं रखेगी आरक्षित
ग्रामीण इलाकों में भी इंटरनेट की सुविधा सहज
5जी की सेवाएं ग्राहकों को सस्ती मिल सकेंगी

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सरकारी योजनाओं के लिए रकम जुटाने, ढांचागत आधार के कार्यों को गति देने और जनोपयोगी प्रस्तावों को अमली जामा पहनाने के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी से करीब छह लाख करोड़ रुपये जुटाने का निर्णय किया है। इसके लिए सरकार ने इस साल के अंदर ही अब तक का सबसे बड़ा मेगा स्पेक्ट्रम नीलामी करने का निर्णय किया है। इसके अंतर्गत सरकार अपने पास कोई भी स्पेक्ट्रम रिजर्व रखने की जगह समस्त मौजूदा स्पेक्ट्रम को निजी कंपिनयों को नीलाम करेगी।
सरकार चाहती है कि स्पेक्ट्रम नीलामी से 5जी सेवाएं सस्ती होंगी और ग्रामीण इलाकों में भी फाइबर-टू-द-होम (एफटीटीएच) इंटरनेट उपलब्ध हो सकेगा। इस योजना को डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन (डीसीसी) ने हरी झंडी दे दी है। यह कमीशन टेलीकॉम मामलों पर फैसला करने वाला सबसे बड़ा आयोग है। नीलामी के लिए आयोग ने ट्राई, दूरसंचार नियामक प्राधिकरण से एक बार फिर से संस्तुति आमंत्रित करने का निश्चय किया। ट्राई को अनुरोध किया गया है कि वह स्पेक्ट्रम नीलामी पर फिर से अपनी सलाह दे।
एक अधिकारी ने कहा कि सरकार मौजूदा समय तक केवल अपना 40 प्रतिशत स्पेक्ट्रम बेचती थी। लेकिन इस बार सरकार अपने पास मौजूद समस्त स्पेक्ट्रम की नीलामी करेगी। इसमें बहुप्रतीक्षित 5जी स्पेक्ट्रम भी शामिल होगा। दूरसंचार मंत्रालय अलग बैंड में करीब 8600 मेगाहर्टज स्पेक्ट्रम को नीलामी के लिए उपलब्ध कराएगा। इस अधिकारी ने कहा कि स्पेक्ट्रम के आरक्षित मूल्य से सरकार को करीब 5.83 लाख करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है।
यह राशि और उपर जा सकती है क्योंकि नीलामी में कंपनियां जब बोली लगाएंगी तो राशि उपर जाएंगे। इस अधिकारी ने कहा कि यह सही है कि कंपनियां आरक्षित मूल्य कम करने की मांग कर रही है। इसको ध्यान में रखते हुए हमनें ट्राई को कहा है कि वह नीलामी की प्रक्रिया, स्पेक्ट्रम नीलामी से हासिल होने वाली राशि की वसूली का नियम बताने के साथ ही आरक्षित मूल्य पर भी अपनी सलाह फिर से दे। यह बदलाव इसलिए भी जरूरी है क्योंकि प्रधानमंत्री ने सभी को ब्रॉडबैंड देने का लक्ष्य दिया है और डिजिटल इंडिया को भी गति देने का निर्णय किया गया है। ऐसे में नीतियों को इस तरह बनाने की जरूरत है जिससे ये लक्ष्य भी हासिल किये जा सके।

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