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बारह साल से हरीपर्वत थाने की रखवाली कर रहा ‘भूरा’

  • कहने को वह स्वान है लेकिन कारनामे बड़े-बड़े, थाने में 24 घंटे तैनाती
  • अपराधी भी कांपते हैं इससे, तेज आवाज में बोलने पर कर देता है अटैक

भूरा किसी इंस्पेक्टर, एसआई या कांस्टेबल से कम नहीं है। भूरा ने कोई ट्रनिंग नहीं ली, फिर भी कानून के प्रति वफादार है। भूरा की निगाहें अपराधियों पर टकटकी लगाए रहता है। अपराधी भी उससे डरते हैं। हम बात कर रहे हैं हरीपर्वत थाने में 24 घंटे तैनात रहने वाले भूरा की। भूरा कहने को तो स्वान है, लेकिन उसकी कार्यशैली किसी से कम नहीं है। पुलिसकर्मियों के साथ उसकी भी ड्यूती रहती है।
बता दें कि थाना हरीपर्वत में एक श्वान 12 साल से तैनात है। इसको पुलिसकर्मी भूरा कहते हैं। भूरा बचपन से अब तक इसी थाने में रहा है। भूरा को हरीपर्वत थाने का डॉग स्क्वायड भी कहा जाता है। पुलिसकर्मी बताते हैं कि वह रात में हवालात के बाहर और दिन में गेट पर बैठता है। अगर कोई अपराधी भागने की कोशिश करे, तो उस पर हमला कर देता है। इसके अलावा अगर पुलिस से कोई ऊंची आवाज बात करे, तो वह उस पर भी चढ़ जाता है। यह देख अपराधी भी उससे खौफ खाते हैं। पूर्व के कुछ इंस्पेक्टरों ने भूरा को थाने में हर समय पड़ा देख उसे सिकंदरा और न्यू आगरा में छुड़वा दिया, लेकिन भूरा कुछ घंटों बाद लौटकर हरीपर्वत थाने में ही आ गया। वर्तमान इंस्पेक्टर प्रवीण मान ने भी हर समय भूरा को थाने में देख पुलिसकर्मियों से कहा कि इसे भगाओ। यह स्वान यहां थाने में क्यों रहता है। इस पर पुलिसकर्मियों ने कहा कि साहब इससे कुछ मत कहना है। यह भी यहां का स्टाफ है।
इसके कारनामों के बारे में कोतवाल को बताया, तो वह सब समझ गए। इधर, एएसपी गोपाल चौधरी ने भी भूरा के बारे में थाना पुलिस से जानकारी ली है। इस पर थाना पुलिस ने एएसपी से कहा है कि साहब आप सादा कपड़ों में आओ आपको एक प्रैक्टिकल कराते हैं। आप पुलिस से अभद्रता करना, फिर देखना भूरा क्या करता है?

नहीं खाता रोटी
आगरा। भूरा रोटी नहीं खाता है। उसके लिए पुलिस पनीर और दूध मंगाती है। नेहरू नगर चौकी इंचार्ज हितेश आजाद उसे रोज जूस पिलाते हैं। भूरा दिन में एक बार नेहरू चौकी पर अवश्य जाता है। वहां जूस पीकर थाने में आ जाता है।

इंसेट
भूरा 12 साल से हरीपर्वत थाने में रह रहा है। पुलिसकर्मियों ने बताया कि उसकी कार्यशैली से अपराधी भी कांपते हैं। भूरा रात में हवालात के बाहर रहकर पहरा देता और दिन में थाने के गेट पर।

प्रवीन मान, इंसपेक्टर हरीपर्वत

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