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क्या अंदर ही अंदर ईरान से युद्ध की तैयारी में है अमेरिका

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेशमंत्री माइक पोम्पियो हालांकि इससे इंकार कर चुके हैं कि वह ईरान से युद्ध करेंगे लेकिन फिर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रंप प्रशासन अंदर ही अंदर ईरान के साथ युद्ध की तैयारी कर रहा है? इस बात को लेकर दो दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं।
पहला नजरिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन का पसंदीदा है। उनका मानना है कि ईरान कुछ तो गलत कर रहा है। कहा जा रहा है कि अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की आशंका को देखते हुए प्रतिक्रिया की तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि इसे लेकर बहुत कम जानकारी सार्वजनिक हो पाई है। अमरीका ने मध्य पूर्व में अतिरिक्त सेना और साजो-सामान की तैनाती की है। साथ ही इराक से उसने गैर-महत्वपूर्ण राजनयिक कर्मचारियों की संख्या घटा दी है। ऐसी खबरे हैं कि वह युद्ध की योजनाओं पर भी विचार कर रहा है। ईरान के लिए संदेश साफ है अगर मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर किसी भी तरह से हमला हुआ, फिर वह ईरान ने किया हो या फिर इसके परोक्ष संगठन या सहयोगियों ने, इसका कड़ा जवाब सैन्य ढंग से दिया जाएगा। वहीं, दूसरा दृष्टिकोण इस पूरे संकट के लिए अमेरिका को जिÞम्मेदार बताता है। जाहिर है, यह नजरिया ईरान का है मगर ट्रंप प्रशासन के तौर-तरीकों के कई अमेरिकी आलोचक भी यही सोच रखते हैं।
यही नहीं, ट्रंप के कई मुख्य यूरोपीय सहयोगी भी इसी तरह की चिंता जताते हैं। ट्रंप प्रशासन में मौजूद ईरान हॉक्स यानी ईरान को लेकर आक्रामक रुख रखने वाले लोगों, जैसे कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन और विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो, को एक मौका नजर आ रहा है। इस नजरिये के हिसाब से इन लोगों का मकसद ईरान में सत्ता परिवर्तन करना है। वे मानते हैं कि अगर बहुत आर्थिक दबाव डालने पर भी कामयाबी नहीं मिली तो सही समय आने पर सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटा जाएगा।
ये दोनों दृष्टिकोण मौजूदा स्थिति की अलग-अलग हिसाब से व्याख्या करते हैं। दोनों ही अपने पक्ष में कुछ बातों को उभारते हैं तो कुछ तथ्यों को नजरअंदाज कर देते हैं। सच्चाई यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच का विवाद भले ही कि किसी पूर्व-निर्धारित योजना के बिना अचानक उभरा हो, मगर ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही ऐसे हालात की आशंका जताई जा रही थी। परमाणु समझौते के दौरान जिन प्रतिबंधों को हटाया गया था, इस समझौते के टूट जाने के बाद वे फिर से ईरान पर लागू हो गए हैं। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईरान अब तंग आ चुका है। वह यूरोपीय देशों से कह रहा है कि हमारी खराब होती अर्थव्यवस्था की मदद करो। वह धमकी दे रहा है कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो वह परमाणु समझौते से पीछे हट जाएगा। ऐसा हुआ तो ट्रंप प्रशासन को और बहाना मिल जाएगा।

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