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आरओबी के नीचे सालों तक बर्बाद हुआ था पानी और पैसा

  • डेढ़ महीने तक रही थी जलापूर्ति प्रभावित
  • मेयर ने कहा था दोबारा नहीं होगी पुनरावृत्ति

जल संस्थान की पाइप लाइन के ऊपर निर्माण होना जल संकट को बढ़ावा देता है। विकास के नाम पर पाइप लाइनें भेंट चढ़ रही हैं। गुरुद्वारा गुरु का ताल के पास आरओबी के नीचे सालों तक पानी और पैसा बर्बाद हुआ था। मरम्मत के लिए डेढ़ महीने तक जलापूर्ति प्रभावित रही थी। पानी के लिए हाहाकार मच गया था।
ज्ञातव्य है कि नौ जनवरी को यहां कोठी मीना बाजार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा थी। इससे करीब एक पखवाड़े पहले सिकंदरा डब्ल्यूटीपी (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) से आनी वाली 1600 एमएम की राइजिंग मेन (मुख्य पाइप लाइन) में गुरुद्वारा गुरु का ताल के पास आरओबी के नीचे लीकेज हो गयी। ये लीकेज कोई नहीं थी, वो वर्षों पुरानी समस्या थी। यहां लीकेज और मरम्मत का सिलसिला चलता रहता था। मरम्मत के नाम पर पैसा और लीकेज के नाम पर पानी बर्बाद होता रहा। जब इस लीकेज के स्थायी समाधान के लिए जल संस्थान ने कवायद की तो पाइप लाइन के ऊपर आरओबी के पिलर बना हुआ था। मरम्मत नहीं हो सकती थी। इसके बाद यहां कम डाया की पाइप लाइन 1600 एमएम की पाइप लाइन में अंदर फंसाई गयी। इस पर करीब 44 लाख रुपये का खर्चा हुआ। इसके साथ लाखों लोगों को डेढ़ महीने तक पानी का संकट झेलना पड़ा था।
बता दें कि उस वक्त मेयर नवीन जैन ने निरीक्षण करने के बाद सेतु निगम पर बिना एनओसी के कार्य करने के लिए कार्रवाई करने की दिशा में कदम उठाने को निर्देश दिये थे। उन्होंने कहा था कि इस तरह की अब कोई पुनरावृत्ति नहीं होगी। बिना जल संस्थान की एनओसी के कोई कार्य नहीं होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हाईवे पर बिना एनओसी के फुट ओवर ब्रिज बन रहे हैं। इसी कारण कमला नगर में 400 एमएम की पाइप लाइन टूट गयी। ब्रिज के फाउंडेशन के लिए खुदाई की गयी थी।

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