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ताज की भार वहन क्षमता का अध्ययन अभी अधूरा

रुका पड़ा है मुख्य गुम्बद चमकाने का कार्य
अध्ययन के बाद ही होगा मडपैक का निर्णय

आगरा। ताजमहल की भार वहन क्षमता का अध्ययन न हो पाने के कारण मुख्य गुम्बद को चमकाने का काम अधर में लटका हुआ है। गुम्बद की ऊंचाई अधिक होने के कारण यहां पाड़ का वजन बढ़ जाएगा और यह वजन स्मारक की भार वहन क्षमता का अध्ययन किये जाने के बाद ही बढ़ाया जा सकता है।
गौरतलब है कि बढ़ते प्रदूषण के कारण ताजमहल के पीले पड़ने की सूचनाओं के बाद संसद की स्थाई पर्यावरण समिति ने मडपैक से सफाई कराये जाने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रसायन शाखा ने वर्ष 2015 में मडपैक की शुरुआत की। ताज के मुख्य मकबरे, मीनारों, छतरियों को मडपैक से साफ किया गया। उस समय अप्रैल, 2018 तक ताज के मुख्य गुंबद पर मडपैक का लक्ष्य तय किया गया था।
यह भी तय किया गया कि पहले पाड़ बांधे जाने से मकबरे पर पड़ने वाले भार का अध्ययन हो। पहले सेंट्रल नेशनल एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) और बिल्डिंग रिसर्च आॅफ इंडिया (सीबीआरआई) से अध्ययन कराने पर विचार किया गया। बाद में एएसआई ने स्वयं अध्ययन करने का निर्णय लिया। एएसआई के इंजीनियरिंग विभाग को यह अध्ययन करना था, लेकिन अध्ययन न हो पाने के कारण गुंबद पर मडपैक नहीं हो पा रहा है। बताया जाता है कि रसायन शाखा मुख्यालय की अनुमति का इंतजार कर रही है। इसमें अब तक एक साल की देरी हो चुकी है और मुख्य गुम्बद और मकबरे के अन्य हिस्सों में फर्क दिखाई देने लगा है।

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