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धोनी की गलती से चेन्नई ने गंवाई ट्रॉफी?

मुंबई ने अंतिम गेंद पर चेन्नई को एक रन से हराकर आईपीएल ट्रॉफी फिर जीती

शार्दूल से बेहतर तो हरभजन या दीपक चाहर को भेज सकते थे कप्तान धोनी

-सचिन ने माना धोनी, वाटसन का रन आउट होना मैच का टर्निंग प्वाइंट

हैदराबाद। आईपीएल-12 का फाइनल जो मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेला गया वह इतना रोमांचक था कि आधी रात को भी क्रिकेट प्रेमियों की नींद उड़ गई। चेन्नई के गेंदबाजों ने मुंबई को 20 ओवरों में आठ विकेट के नुकसान पर 149 रनों पर रोक दिया था। वहीं चेन्नई 20 ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर 148 रन ही बना सकी।
दिलों की धड़कनें रोक देने वाले इस फाइनल मुकाबले में मुंबई इंडियंस ने चेन्नई सुपर किंग्स को आखिरी गेंद तक नाको चने चबवाने के बाद आखिरकार केवल एक रन से मात दी। यह आखिरी गेंद थी मुंबई के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाज और अपनी खतरनाक यॉर्कर के लिए जाने जाने वाले लसिथ मलिंगा की। उनके सामने थे चेन्नई के शार्दुल ठाकुर।
हालांकि जीत के लिए 150 रनों की तलाश में शार्दुल ठाकुर जब मैदान में उतरे तो टीम को दो गेंद पर केवल चार रनों की जरूरत थी। मलिंगा की पहली गेंद पर शार्दुल ठाकुर ने दो रन भी बनाए, लेकिन अगली और आखिरी गेंद पर वह मलिंगा के शानदार आॅफ कटर का शिकार हो गए.गेंद मिडिल स्टंप के ठीक सामने खड़े शार्दुल ठाकुर के पैड पर जाकर रुकी और अंपायर को अपनी अंगुली उठाने में कोई संकोच नहीं हुआ। इसके साथ ही मुंबई के डगआउट में बैठे खिलाड़ी जोश और खुशी में भरकर मैदान में दौड़ पड़े।
दूसरी तरफ चेन्नई के खेमें में मायूसी छा गई। पैड बांधे हाथ में बैट लिए हरभजन सिंह गुस्से में उठे लेकिन यही समां बता रहा था कि क्या अपने अनोखे निर्णय के दम पर मैच के नतीजे बदलने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने शार्दुल ठाकुर को अंतिम समय में मैदान में भेजकर गलती की। ज्यादातर समीक्षक और मैच में कमेंट्री कर रहे पूर्व क्रिकेटर यही मानते हैं। शार्दुल ठाकुर के मुकाबले हरभजन सिंह चौके-छक्के लगाने के लिए अधिक जाने जाते हैं। हो सकता है प्रथम श्रेणी मैचों में शार्दूल की तेज तर्रार बल्लेबाजी को ध्यान में रखते हुए धोनी ने यह फैसला लिया हो या फिर यह सोचकर कि शार्दूल भज्जी से ज्यादा युवा हैं। अब अब धोनी ने जो निर्णय लिया सो लिया लेकिन हरभजन सिंह के पास हर हाल में शार्दुल ठाकुर से अधिक अनुभव था। दबाव सहने की ताकत भी अधिक थी। भज्जी नहीं हो दीपक चाहर को भेजा जा सकता था। शायद वह बेहतर रहते? इसके अलावा चेन्नई को जीत के दरवाजे पर लगभग पहुंचाने के बाद सलामी बल्लेबाज शेन वॉटसन जिस तरह से रन आउट हुए वह भी चेन्नई की हार की सबसे बड़ी वजह रही। शेन वॉटसन ने पिछली बार साल 2018 में हैदराबाद के खिलाफ नाबाद शतक जमाकर अकेले दम पर चेन्नई को तीसरी बार चैंपियन बना दिया था।
बीते रविवार को भी उन्होंने जिस अंदाज में बल्लेबाजी की उसे देखकर लगा कि वह पिछली पारी को ही दोहरा रहे हैं। उन्होंने रन आउट होने से पहले केवल 59 गेंदों पर आठ चौके और चार छक्कों की मदद से 80 रन बनाए। वहीं सचिन तेंदुलकर ने माना कि धोनी का रन आउट होना टर्निंग प्वाइंट रहा मैच का। वॉटसन ने इतना शानदार मैच बनाया और जितना अनुभव उनके पास है उन्हें मैच जिताकर ही वापस आना चाहिए था।

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