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Agra

पहले कांग्रेस व अब भाजपा का गढ़

आजादी के बाद के चुनावों में कांग्रेस ने नहीं गलने दी किसी की दाल

पहले आगरा पूर्व और अब आगरा उत्तर के नाम से जानी जाने वाली विधान सभा सीट पर अब तक कांग्रेस और भाजपा ही अपना परचम फहराती रही हैं। आजादी के बाद के अधिकांश चुनाव कांग्रेस ने जीते तो 1989 के बाद से यह सीट भाजपा का गढ़ बनी हुई है। एक बात और, अपवाद को छोड़कर इस सीट से वैश्य समाज का विधायक ही चुना गया है। इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के अलावा कोई दूसरा दल पैठ नहीं बना सका। पिछले कुछ चुनावों से बसपा ने कांग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेलकर अपनी दूसरे नंबर की पोजिशन जरूर बना ली है।
आजादी के बाद चुनाव का सिलसिला शुरू होने के बाद इस सीट पर कांग्रेस की जीत का सिलसिला शुरू हुआ जो लगातार जारी रहा। 1962 में जरूर बालोजी अग्रवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में एक बार इस सीट पर कांग्रेस को हरा दिया था। इस सीट पर कांग्रेस की जड़ें कितनी गहरी थीं, इसका अंदाजा 1977 में जनता पार्टी की लहर के दौरान भी कांग्रेस की जीत से लगाया जा सकता है। 1977 में कांग्रेस के सुरेंद्र कुमार सिंधू गैर वैश्य प्रत्याशी रहे, जिन्होंने वैश्यों के गढ़ वाली आगरा पूर्व सीट पर विजय दर्ज कराई थी। 1980 में जनता पार्टी से अलग होकर भाजपा बनने तक यहां जनसंघ चुनाव लड़ती रही।
कांग्रेस के लिए आगरा पूर्व पर आखिरी जीत 1985 का विधान सभा चुनाव था। उस चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी सतीश चंद्र गुप्ता विभव थे। हालांकि मतगणना के बाद प्रशासन ने इस सीट से भाजपा के प्रत्याशी सत्य प्रकाश विकल को निर्वाचित घोषित किया था। सतीश चंद्र गुप्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में विकल के निर्वाचन को चुनौती दी थी। साढ़े चार साल तक हाईकोर्ट में इस मामले में सुनवाई चली थी। 1989 के चुनाव से छह माह पहले हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था, जिसमें विकल के निर्वाचन को रद्द कर सतीश चंद्र गुप्ता को विजयी घोषित किया गया था। 1989 आते-आते भाजपा आगरा में अपनी स्थिति बहुत मजबूत कर चुकी थी। इसी वर्ष हुए विधान सभा चुनाव से यहां से भाजपा की जीत का सिलसिला शुरू हुआ जो लगातार दस चुुनाव (2017 तक) जारी रहा। इस अवधि में पांच बार सत्य प्रकाश विकल और पांच बार जगन प्रसाद गर्ग यहां से विधायक चुने गए। लगभग तीन दशक के दौरान भाजपा ने इस सीट पर अपनी स्थिति लगातार मजबूत की है। हर चुनाव में जहां सत्य प्रकाश विकल ने अपनी जीत का अंतर बढ़ाया तो यही स्थिति जगन प्रसाद गर्ग ने भी कायम रखी। 2017 का आखिरी चुनाव जगन गर्ग लगभग 80 हजार मतों के अंतर से जीते थे।
जो कांग्रेस कभी आगरा पूर्व पर एकछत्र राज करती थी, वह अब आगरा उत्तर सीट पर तीसरे नंबर की पोजिशन में आ चुकी है। पिछले कई चुनाव के दौरान इस सीट पर भाजपा को बसपा की ओर से चुनौती मिली है। बसपा ने भी इस सीट को जीतने के लिए कभी वैश्य तो कभी ब्राह्मण प्रत्याशी पर दांव लगाया, लेकिन हर बार असफलता ही हाथ लगी। इतना जरूर हुआ कि बसपा ने यहां पर कांग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेल दिया है। समाजवादी पार्टी भी इस सीट को जीतने के लिए हर चुनाव में जुगत लगाती रही है, लेकिन हर बार उसके प्रत्याशी भी असफल ही रहे हैं।

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