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पथराव करने वाले छोड़े, निर्दोष फंसाए

कचौरा गांव में आज सुबह हो रही पंचायत, अधिकारियों से करेंगे शिकायत

किरावली। अछनेरा के गांव कचौरा में विवाहिता की मौत के हुए बवाल और पुलिस पर पथराव करने के मामले में अछनेरा पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई को विरोध किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस निर्दोषों लोगों पर कार्रवाई कर रही है। असली गुनाहगारों को छोड़ा जा रहा है। आज सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण गांव में पंचायत कर रहे हैं। वह अधिकारियों से इंसपेक्टर की शिकायत करने की बात कह रहे हैं। उनका आरोप है कि कोतवाल ने दबिश के दौरान निर्दाेष लोगों से भी अभद्रता की है।
विदित हो कि 18 अप्रैल को अछनेरा के गांव कचौरा में एक विवाहिता की हत्या करने का आरोप लगा था। शव दफनाए जाने के दौरान मायका और ससुराल पक्ष के लोगों में विवाद हो गया था। सूचना पर पहुंची अछनेरा पुलिस को भी दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया था। इस मामले में पुलिस ने एक दर्जन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने नामजद आरोपियों की तलाश में दबिशें देना शुरू कर दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस निर्दोषों को परेशान कर रही है। जिन लोगों का इस बवाल से कोई मतलब है और जो वह मारपीट में बीचबचाव करा रहे थे, पुलिस ने उन लोगों को मुकदमे में शामिल कर लिया है। जिन लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया गया है। इंसपेक्टर अछनेरा शेर सिंह निर्दाेषों के घर दबिश दे रहे हैं। वहीं जाट समाज के लोगों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। इंसपेक्टर ने गांव के पूर्व प्रधान कुमरजीत सिंह, हरिओम सिंह, रूपेन्द्र सिंह के साथ जमकर मारपीट की। पूर्व प्रधान कुमरजीत का कहना है कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में उन्हें बवाली के रूप में चिन्हित किया गया है। प्रशासनिक अधिकारी उनकी उम्र और शारीरिक क्षमता का परीक्षण करा लें, क्या 80 वर्ष की उम्र का कोई व्यक्ति पत्थरबाज हो सकता है ?
इंसपेक्टर शेर सिंह का कहना है कि उनके पास बवाल की वीडियोग्राफी पास मौजूद है। उन्होंने घटनाक्रम को लेकर पुलिस के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। उन पर लगाए गए आरोप निराधार है।
इस मामले में ग्रामीणों ने भाजपा प्रत्याशी राजकुमार चाहर से भी शिकायत की है। भाजपा नेता चाहर एडीजी अजय आनंद और एसएसपी अमित पाठक से भी मिले। ग्रामीणों ने कहा कि थाना प्रभारी के क्रियाकलापों की गुप्त रूप से जांच कराई जानी चाहिए। निर्दोष ग्रामीणों का किसी भी तरह का उत्पीड़न न किया जाए।

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