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राष्ट्रीय मुद्दे उठे, प्रत्याशियों ने की जातियों की गोलबंदी

चुनाव का दूसरा चरण

यूपी की आठों सीटें इस समय हैं भाजपा के पास, यहां फिर से जीत की चुनौती

सपा-बसपा और रालोद का अपने वोट बैंक को साधे रखने पर रहा ध्यान

कांग्रेस ने फतेहपुरसीकरी समेत कई अन्य सीटों पर बनाया त्रिकोणीय मुकाबला

SP Singh

आगरा। लोकसभा के दूसरे चरण का प्रचार थम गया है। प्रत्याशी अब 18 अप्रैल को होने वाले मतदान की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इस चरण में यूपी की जिन आठ सीटों पर चुनाव होने जा रहा है, वहां मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए विभिन्न दलों के राष्ट्रीय नेताओं ने मथा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रालोद अध्यक्ष चौ. अजित सिंह एवं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी समेत अन्य नेताओं की सभाएं हुईं। भाजपा नेताओं ने सपा-बसपा और कांग्रेस को निशाने पर लिया तो इन दलों के नेताओं ने भाजपा पर तीर छोड़े। प्रचार अवधि में भाजपा के प्रत्याशियों ने जहां नरेन्द्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के नाम पर वोट मांगे तो कांग्रेस उम्मीदवारों ने गरीबों के खाते में 72 रुपये देने को मुद्दा बनाकर मतदाताओं का दिल जीतने की कोशिश की। सपा-बसपा और रालोद के प्रत्याशियों की ओर से अपने नेताओं के नाम पर वोट मांगे गए। विभिन्न दलों के प्रत्याशियों का ध्यान पार्टी समर्थित जातियों की गोलबंदी पर ज्यादा केंद्रित रहा। सभी दलों ने मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचा दी है और अब यह वोटर को तय करना है कि वह किसे विजय की माला पहनाएंगे। 18 अप्रैल को मतदाता ईवीएम में प्रत्याशियों का भाग्य कैद कर देंगे।
यूपी की जिन सीटों पर कल वोट पड़ने जा रहे हैं, वे सभी इस समय भाजपा के पास हैं। 2014 में भाजपा ने इन आठों सीटों पर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था। भाजपा के पास अपनी इन आठों सीटों को बचाने की चुनौती है तो गठबंधन कर मैदान में उतरे समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और रालोद ने इन सीटों को भाजपा से छीनने में पूरी ताकत झोंकी। यह उल्लेख करना जरूरी है कि वेस्ट यूपी की जिन आठ सीटों आगरा, फतेहपुरसीकरी, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़, बुलंदशहर, अमरोहा और नगीना पर दूसरे चरण में चुनाव होने जा रहा है, वहां सपा-बसपा और रालोद का खासा जनाधार है। कांग्रेस ने भी आठों सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारकर मुकाबला त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है। फतेहपुरसीकरी पर कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर ने प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी चुनौती पेश कर रखी है। प्रचार अभियान के दौरान सपा-बसपा और रालोद के मुखिया इस बेल्ट के मुस्लिम मतदाताओं को यही समझाने की कोशिश करते रहे कि भाजपा को वही हरा सकते हैं। शायद इन दलों के नेताओं को डर था कि कहीं मुस्लिम वोटों में कांग्रेस विभाजन की स्थिति न पैदा कर दे। सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की ओर से मिलने वाली चुनौती को भांपकर भाजपा ने कई सीटों पर अपने प्रत्याशियों में बदलाव भी किया। आगरा से दो बार जीत चुके एससी आयोग के अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया की जगह यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल को मैदान में उतारा गया है। इसी प्रकार फतेहपुरसीकरी और हाथरस में नए प्रत्याशी मैदान में उतारे गए हैं। कुल मिलाकर भाजपा नेतृत्व ने चुनाव को लेकर किसी प्रकार का जोखिम न लेकर मौजूदा सांसदों का टिकट काटने में भी कोताही नहीं बरती है। दूसरे चरण के चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं ने भले ही अपने घोषणा पत्र में किए वायदों का जनता के बीच जिक्र किया, लेकिन प्रत्याशियों के स्तर पर यह चुनाव जातियों को गोलबंद करने तक सीमित रहा। सपा-बसपा और रालोद के प्रत्याशी यादव, दलित, मुस्लिम और जाट वोटों को गोलबंद करने पर ध्यान देते दिखे तो भाजपा प्रत्याशियों ने शेष जातियों (सवर्णों, गैर यादव पिछड़ी जातियों और गैर जाटव दलित जातियों) की गोलबंद करने में पूरी ताकत झोंक दी। कुल मिलाकर प्रत्याशियों ने क्षेत्र के विकास जैसे मुद्दों के बजाय अपने नेताओं के चेहरों के नाम पर वोट मांगे। मतदाता भी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के नाम पर प्रभावित दिखे।

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