आज की खबर आज
Agra

चुनाव बाद नगर निगम में बदल सकते हालात!

  • प्रत्याशी के साथ कुछ पार्षद नहीं दिखा रहे हैं सक्रियता
  • दल बदलने का बन रहा मूड, पर वोट कटने का भी डर
  • चुनावी ड्यूटी के कारण समस्याओं के समाधान में देरी

मोहब्बत की नगरी से लेकर नवाबों की नगरी तक सपा और बसपा को छोड़कर भाजपाई बनने का क्रेज बढ़ रहा है। इसलिए नगर निगम में चुनाव बाद हालातों में बदलाव हो सकता है। अभी कई और पार्षद भगवा चोला ओढ़ने का मूड बना रहे हैं, लेकिन उन्हें पार्टी के वोट बैंक का डर भी सता रहा है। लोकसभा चुनाव में अपने दल के प्रत्याशी के साथ पूर्ण सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं, जो पार्टीजनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
नगर निगम की सीमा में 100 वार्ड हैं। इनमें सबसे बड़ा दल भाजपा है, जिसके पार्षद बढ़कर अब 53 से 63 हो गये हैं। ये दस पार्षद सपा, बसपा, कांग्रेस और निर्दलीय हैं, जो भाजपाई हो चुके हैं। भाजपाई होते ही नगर निगम में उनका प्रभाव बढ़ गया है, जिसे देख दूसरे अन्य साथी (पार्षद) भी प्रभाव को लेकर चर्चा करते नजर आते हैं। कहीं न कहीं उन्हें भी अपने वार्ड में विकास कार्यों की संख्या बढ़ाने और निगम अफसरों में अपना दबदबा बनाने के लिए ऐसे प्रभाव की आवश्यकता है। चर्चा है कि कुछ पार्षद अपने दल के प्रत्याशी के साथ पूर्ण सक्रियता नहीं दिखा रहे, जिसकी शिकायत उनके संगठन में भी हो चुकी है।
भाजपा पार्षदों से उनके मेल-मिलाप की चर्चाएं हैं। एक पार्षद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भले ही वो चुनाव निर्दलीय लड़ें, लेकिन पार्टी से उनके जुड़ाव की बात मतदाता जानते हैं। इसलिए पार्टी के वोट बैंक की बदौलत जीत मिली थी। पार्टी संगठन ने भी पूरे अधिकार के साथ लोकसभा चुनाव में कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी। मन में वो उमंग नहीं है जो होनी चाहिए। वार्ड की जनता की समस्याओं के समाधान के लिए लोकसभा चुनाव की राजनीति काम नहीं आती है, केवल नगर निगम की राजनीति ही काम आती है। इसलिए इस पर ही पूरा ध्यान दिया जाता है।
निगम में भाजपा की सरकार है। अधिकारी-कर्मचारी भाजपाईयों के हर काम करते हैं। दूसरे दलों के पार्षदों के कार्यों को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। लोकसभा चुनाव में सक्रियता कम है। भाजपाई बनने का मूड तो है, लेकिन जिस पार्टी की मोहर लगी है उसके वार्ड में वोट हैं, जो भाजपाई बनते ही खिसक सकते हैं। इससे पार्षद के चुनाव में नुकसान हो सकता है। अभी तो भाजपाईयों से संबंधों में सुधार किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कई भाजपा पार्षद भी चुनाव प्रचार में खासी रुचि नहीं ले रहे। उन पर कठेरिया गुट के होने की मुहर लगी हुई है, जिसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहती हैं। चुनाव बाद कई पार्षद भाजपाई हो सकते हैं। इससे नगर निगम के हालात बदल सकते हैं। बता दें कि चुनावी ड्यूटी में अधिकारी-कर्मचारी लगे होने के कारण समस्याओं के समाधान में देरी हो रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *