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पूंछ ने भी छोड़ा हाथी का साथ!

कांग्रेस: पंजे में आई हाथी की ताकत

एक समय था आगरा में हाथी जब चिंघाडता था तो विरोधी दलों में घबराहट मच जाती थी। इस बार लोकसभा चुनावों में बसपा सुप्रीमो मायावती एवं संगठनात्मक रूप से यहां बसपा की कमान सम्भाल रहे पदाधिकारियों की रणनीति इतनी फेल साबित हो रही है कि आगरा में हाथी के नाक, कान, दांत और यहां तक कि पूंछ भी साथ छोड़ गई है। आगरा में पिछले लम्बे समय से राजनीतिक रूप से बसपाइयों के सामने कांग्रेसी ठहर नहीं पाते थे लेकिन कल वही कांग्रेसी बसपा को बड़ा झटका देकर मैदान में ताल ठोकते दिखे। बसपा के तीन महावत यानी पूर्व विधायकगण डा. धर्मपाल सिंह, सूरजपाल सिंह, भगवान सिंह कुशवाह हाथी से कूदकर कांग्रेस के पाले में पहुंच गए। इस झटके ने बसपा को लखनऊ तक हिला दिया है। देवेंद्र चिल्लू, पूर्व विधायक गुटियारीलाल दुबेश के बाद डा. धर्मपाल सिंह, सूरजपाल सिंह के अलावा बसपा से निष्कासित पूर्व विधायक भगवान सिंह कुशवाह द्वारा बसपा छोड़ने पर लोग चुटकी ले रहे हैं कि नाक, कान, दांत और सूंड़ के बाद पूंछ ने भी हाथी का साथ छोड़ दिया है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के इस झटके से बसपाई अवाक हैं। वहीं कांग्रेस में जोश और उत्साह का वातावरण है। एत्मादपुर एवं आगरा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र (दयालबाग) से विधायक रहे डा. धर्मपाल सिंह जनता के बीच काफी लोकप्रिय हैं। उनके कांग्रेस में चले जाने से बसपा को भारी नुकसान हुआ है वहीं कांग्रेस की ताकत में इजाफा हो गया है। इसी तरह भगवान सिंंह कुशवाह खेरागढ़ से दो बार बसपा की टिकट पर विधायक चुने लड़े और विधायक चुने गए। ठाकुर सूरजपाल सिंह फतेहपुरसीकरी सीट से दो बार बसपा की टिकट पर चुनाव लड़े और विधायक बने। पिछली बार तीनों ही विधायक चुनाव हार गए थे लेकिन तीनों ही पूर्व विधायकों की अपने-अपने क्षेत्र में जनता के बीच गहरी पकड़ है जिससे कांग्रेस को ताकतवर बना दिया है, वहीं बसपा को कमजोर कर दिया है। बसपा को बड़ा झटका देते हुए दो-दो बार के विधायक रहे डा. धर्मपाल और ठाकुर सूरजपाल सिंह, पूर्व विधायक भगवान सिंह कुशवाह कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और फतेहपुरसीकरी सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी राज बब्बर की मौजूदगी में संजय प्लेस स्थित एक होटल में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। राज बब्बर ने इन सभी नेताओं के साथ अपने संबंधों को एक-एक करके गिनाया और सीकरी से चुनाव जीतने का दावा किया। उन्होंने कहा कि आगरा उनकी जन्म भूमि है जिसने उन्हें एक बार फिर बुलाया है और वे यहां से चुनाव लड़ने आए हैं। पार्टी में शामिल हो रहे यह सभी चेहरे कभी उनके पुराने साथी रहा करते थे और उनके सहारे ही उन्होंने आगरा में अपनी राजनीति शुरू की थी।
इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष उपेंद्र सिंह, वरिष्ठ नेता केशव दीक्षित, सादाबाद के पूर्व विधायक डा. अनिल चौधरी, रालोद के पूर्व जिलाध्यक्ष बृजेश चाहर के पिता एवं ब्लाक प्रमुख अकोला ओंकार सिंह, पूर्व ब्लाक प्रमुख राजवीर सिंह, पूर्व विधायक बहादुर सिंह सिकरवार, ओमवीर सिंह तोमर, जिलाध्यक्ष दुष्यंत शर्मा, शहर अध्यक्ष अबरार हुसैन, कार्यवाहक शहर अध्यक्ष जमीलउद्दीन, वरिष्ठ नेता मुरारीलाल गोयल, विनोद बंसल, प्रवीन राजपूत, शिल्पा दीक्षित आदि उपस्थित रहीं।

14 दिन में क्या से क्या हो गई बसपा!

आगरा में बसपा के बुरे दौर की शुरुआत नौ मार्च को तब हुई जब फतेहपुरसीकरी सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ रहीं पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय ने अपने कदम पीछे खींच लिये। जब तक वह यहां चुनाव मैदान थीं, तब तक बसपा पूरे दमखम में नजर आ रही थी। सीमा उपाध्याय के मैदान में होने से राज बब्बर फतेहुपरसीकरी से मुरादाबाद की ओर रुख कर गए थे। जब राज बब्बर की टिकट मुरादाबाद से हो गई तो पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय के भी कदम डगमगाने लगे और आनन-फानन में उन्होंने फतेहपुरसीकरी सीट से चुनाव लड़ने से मना कर दिया। इसके बाद फतेहपुरसीकरी सीट पर हार-जीत के आंकड़े इस तरह बदले कि बसपा में नए प्रत्याशी की तलाश शुरू हो गई। बसपा में टिकट के दावेदारों की सूची में सबसे पहला नाम पूर्व विधायक डा. धर्मपाल का ही था और उनके बाद पूर्व विधायक सूरजपाल सिंह, दिगम्बर धाकरे समेत कई अन्य नाम भी शामिल हुए। जब बसपा ने इस सीट से राजवीर सिंह को बतौर प्रत्याशी मैदान में उतार दिया तो बसपा खेमे में इसका विरोध भी हुआ और धीरे-धीरे बसपा में अंदरखाने तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गर्इं। इसी बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर की मुरादाबाद से फतेहपुरसीकरी सीट पर बतौर प्रत्याशी वापसी हो गई और उन्होंने बसपा में अंदरखाने चल रही उधेड़बुन को भांप लिया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मौका देखकर चौका लगाने में नहीं चूके और उन्होंने एक ही झटके में बसपा सुप्रीमो द्वारा बाहरी व्यक्ति को टिकट दिए जाने से नाराज दिग्गजों से सम्पर्क साधा। बसपा के दिग्गजों ने अपने अपने गुस्से का इजहार करते हुए बसपा सुप्रीमो को कल बाय-बाय कर दिया और तीन पूर्व विधायकों ने बसपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया।

कुछ निकाल दिए तो कुछ
छोड़ गए, अब क्या बचा!

बसपा में पहले से ही दिग्गज और अनुभवी नेताओं का टोटा चल रहा था। रही सही कसर कल कांग्रेस ने पूरी कर दी। बसपा में दिग्गज नेताओं के रूप में जो चेहरे बचे थे उनमे से अधिकांश को कल कांगे्रस ने तोड़ लिया। बता दें कि पूर्व में गुटियारी लाल दुबेश, उमेश सैंथिया, देवेंद्र सिंह चिल्लू आदि के बाद कल डॉ. धर्मपाल सिंह, सूरजपाल सिंह एवं भगवान सिंह कुशवाह पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में चले गए। इससे पहले बसपा इनमें नारायन सिंह सुमन, वीरू सुमन, कुंवर चंद वकील, भारतेंदु अरुण, धर्मप्रकाश भारतीय को पार्टी से बाहर कर दिया गया। जबकि यह सभी पार्टी के लिए एक पहचान थे। जोन कोआर्डिनेटर सुनील चित्तौड़ आगरा के रहने वाले हैं। उनकी रणनीति भी बसपा के काम नहीं आई। वे एक भी नेता को दूसरे दल में जाने से रोक नहीं पाए। श्री चित्तौड़ समेत बसपा के दूसरे पदाधिकारियों की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।

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