आज की खबर आज
Agra

घोषणा से एक घंटे पहले कटी कठेरिया की टिकट

टिकट कटने पर अब तक भौचक हैं कठेरिया और उनके समर्थक!

एससी आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामशंकर कठेरिया पूरी तरह आश्वस्त थे कि वे ही तीसरी बार आगरा लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार होंगे। इसकी झलक उनके आवास पर आयोजित होली मिलन समारोह में साफ दिख रही थी। इधर आगरा में डॉ. कठेरिया और उनके समर्थक होली एवं उन्हें फिर से टिकट मिलना तय मानकर खुशियां मनाने में व्यस्त थे, उधर तीन विधायक एवं पार्टी के कुछ पदाधिकारियों की टीम दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के समक्ष पूरा दम लगा रही थी कि आगरा से कठेरिया की जगह किसी और को प्रत्याशी बनाया जाए। शीर्ष नेताओं से यहां तक कह दिया कि या तो हमारा इस्तीफा ले लो या फिर कठेरिया का टिकट काट दो। शीर्ष नेतृत्व को शायद यह अंदाजा नहीं था कि कठेरिया का इस कदर विरोध हो सकता है। अंतत: नेतृत्व फैसला पलटने के लिए मजबूर हो गया और प्रत्याशियों के नाम की घोषणा होने से एक घंटे पहले आगरा सीट पर डॉ. कठेरिया का नाम काटकर कैबिनेट मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल का नाम लिख दिया गया।
जब आगरा सीट पर बतौर भाजपा प्रत्याशी प्रो. एसपी सिंह बघेल के नाम की घोषणा हुई तो डॉ. कठेरिया और उनके समर्थकों को इस पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन यही सच्चाई थी, जिसे उन्हें बाद में स्वीकार करना पड़ा। हैरत की बात तो यह है कि भाजपा का डॉ. कठेरिया विरोधी खेमा भी इस फैसले से भौचक था और भरोसा नहीं कर पा रहा था कि क्या वाकई डॉ. कठेरिया की टिकट कट गई।
दरअसल जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हो या फिर मेयर की टिकट का मामला, या फिर कोई और मौका। आगरा में विभिन्न अवसरों पर भाजपा में डॉ. कठेरिया विरोधी खेमे को कई बार शिकस्त मिली थी। यह ग्रुप भी मानने लगा था कि इस बार भी उन्हें आखिर में असफलता ही मिलेगी। इसी कारण डॉ. कठेरिया की टिकट कटने की बात को विरोधी खेमा भी स्वीकार नहीं कर पा रहा था। जब शीर्ष नेतृत्व ने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की और उसकी प्रतियां विभिन्न माध्यमों से उनके पास आने लगीं और उसमें आगरा सीट से जब प्रो. बघेल का नाम देखा तब जाकर भरोसा हुआ कि यही सच है। सच्चाई जानने के बाद भाजपा में डॉ. कठेरिया के विरोधी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई तो डॉ. कठेरिया और उनके समर्थकों में घोर निराशा का माहौल बन गया।
सूत्रों का कहना है कि टिकट कटने की खबर लगते ही डॉ. कठेरिया दिल्ली के लिए रवाना हो गए और पिछले दो दिन से दिल्ली में ही हैं। डॉ. कठेरिया के कुछ करीबियों का कहना है कि बहुत बड़ी चूक के कारण यह टिकट कटी है। जिस तरह पार्टी के कुछ लोगों ने शीर्ष नेतृत्व के सामने डॉ. कठेरिया के विरोध में पक्ष रखा था उसी तरह डॉ. कठेरिया को पहले ही अपने समर्थन में इस तरह का पक्ष रख देना चाहिए था। कठेरिया और पार्टी में उनके विरोधियों को तराजू के दो पलड़ों तोला जाए तो कठेरिया ज्यादा कमजोर नहीं हैं। कठेरिया के समर्थन में उनके संसदीय क्षेत्र के दो विधायकों समेत जिला पंचायत अध्यक्ष एवं मेयर समेत चार पूर्व शहर अध्यक्षों एवं कई पार्टी पदाधिकारियों को गिना जा सकता है। ऐसे में इन समर्थकों को लेकर यदि कठेरिया पहले से यह दांव खेल जाते तो शायद उनका टिकट कटने से बच जाता और उन्हें लम्बे अर्से बाद इस तरह शिकस्त नहीं झेलनी पड़ती।
खैर कुछ भी हो। यदि गुटबाजी से तटस्थ भाजपा नेताओं एवं करीबियों की मानें तो सच यह कि कठेरिया को उनके कुछ चेहरे ले डूबे। ये चेहरे कठेरिया के इर्द-गिर्द घुमड़ते रहते थे। इन्हीं की वजह से कुच अच्छे लोग भी कठेरिया से दूर हो गए थे। कठेरिया का विरोध अब तक संसदीय क्षेत्र के तीन विधायकों तक था, लेकिन पिछले दिनों कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल के साथ भिड़ंत के बाद पार्टी नेतृत्व यह सोचने को मजबूर हो गया कि क्या कठेरिया पर दांव लगाना ठीक रहेगा?
सूत्रों के मुताबिक आज सुबह तक डा. कठेरिया दिल्ली में डेरा डाले हुए थे। दिल्ली में पिछले दस वर्ष का उनका नेटवर्क भी आगरा से टिकट दिलाने में कारगर साबित नहीं हो पा रहा है। हालांकि उन्हें हाथरस और इटावा से किसी एक स्थान पर चुनाव लड़ाए जाने की उम्मीद उनके समर्थक पाले हुए हैं। समर्थकों को भरोसा है कि शीर्ष नेतृत्व कठेरिया और उनके समर्थकों को सामान्य करने के लिए कुछ नया विकल्प खोज सकता है ताकि आगरा सीट पर चुनाव में कोई अवरोध पैदा नहीं हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *