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फोटो चालान भी करेंगे और परेशान भी!

फोटो चालान होने से पुलिसकर्मियों को तो सहूलियत लेकिन लोगों की मुश्किलें बढ़ीं

  • शमन शुल्क की रसीदें हो गर्इं खत्म, लखनऊ ने रसीद देने के लिए किया मना
  • आगरा। हाईटेक होते युग में पुलिस भी हाईटेक हुई है। अब तक जो चालान मेन्युअल होते थे। उसे ई-चालान में तब्दील कर दिया गया है। हालांकि पुलिसकर्मियों पर बुनियादी सुविधाओं का अभी भी अभाव है। इस बात की ओर अधिकारियों का ध्यान नहीं है। चालान को लेकर आ रही शिकायतों को कैसे दूर किया जाए, इस पर मंथन नहीं हो रहा है।
  • सड़कों पर यातायात नियमों को उल्लघंन करने वालों को सही लाइन पर लाइन के लिए एसएसपी अमित पाठक ने नया तरीका निकाला है। उनके निर्देश पर अब ऐसे वाहनों के फोटो चालान हो रहे हैं। एसपी ट्रैफिक प्रशांत कुमार के प्रयास से मशीनों से ई-चालान होना शुरू हो गए, लेकिन इस सुविधाओं को बेहतर तरीके से चलाने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस फोटो चालान भी कर रही है और परेशान भ्डीएलए ने फोटो चालान को लेकर आ रही समस्याओं को जाना तो कई बातें सामने आर्इं। इन समस्याओं पर किसी भी अधिकारी का ध्यान नहीं है। ट्रैफिक पुलिस तो लगातार चालान कर रही है, क्योंकि उसे एसएसपी द्वारा दिया टारगेट जो पूरा करना है, लेकिन वाहन चालकों की परेशानियों की किसी को फिक्र नहीं।

शमन शुल्क की रसीदें कम पड़ रहीं
शहर में दौड़ते वाहनों के नियमों के उल्लंघन पर फोटो चालान तो धड़ल्ले से हो रहे हैं लेकिन जब चालान को लेकर लोग फाइन भरने के लिए पहुंच रहे हैं तो ट्रैफिक लाइन में उनसे कहा जा रहा है कि अभी शमन शुल्क वाली रसीदें खत्म हो गई हैं। कल भी कई लोग चालान भरने के लिए पहुंचे। लाइन के बाहर सड़क पर दो होमगार्ड तैनात थे जो बाहर से लोगों को लौटा रहे थे। वह कह रहे थे कि अभी चालान नहीं भरे जा रहे हैं। किताब नहीं है। आप कल आना या शाम तक देख लेना। एक होमगार्ड तो होली के बाद तक का समय दे रहा था। काफी देर बाद दो रसीद बुक आर्इं और फिर उसके बाद लोगों ने चालान भरना शुरू किए।
शमन शुल्क की रसीदों में कमी को लेकर डीएलए ने पड़ताल की तो पुलिसकर्मियों ने बताया कि पहले यह रसीदें लखनऊ से आती थीं, लेकिन जब से ई-चालान शुरू हुए हैं तो वहां से रसीद बुक मिलना बंद हो गई हैं। लखनऊ का कहना है कि जब ई-चालान शुरू हो गये हैं तो पैमेंट भी आॅनलाइन ही जमा कराएं। कई शहरों में ई-चालान का आॅनलाइन पैमेंट जमा किया जाता है। नोएडा पुलिस ने तो ई-पैमेंट की सुविधा को काफी समय पहले ही शुरू कर रखा है, लेकिन यहां के अधिकारियों को यह सुविधा अभी समझ नहीं आ रही है। ट्रैफिक पुलिस ने अपने स्तर पर कुछ रसीद बुक छपवाई हैं। ये भी अब समाप्ति की ओर हैं। उधर चालानों की संख्या काफी बढ़ गई है।

फर्जी नंबरों पर दौड़ रहे वाहन
फोटो चालान से यह बात तो साबित हो गई है कि शहर में फर्जी नंबर पर वाहन दौड़ रहे हैं। फोटो चालान होने के बाद जब चालान घर पर पहुंच रहा है तब वाहन स्वामी बताता है कि उसकी गाड़ी तो चोरी हो चुकी है। उसका मुकदमा भी थाने में दर्ज करा रखा है। कहीं यह बात सामने आ रही है कि उसकी बाइक है, लेकिन चालान उस नंबर पर एक्टिवा का आया है। इस बात से साबित हो रहा कि बाइक के नंबर को डालकर चोरी की एक्टिवा को चलाया जा रहा है। पूर्व में ऐसा होता था कि जब गाड़ी को रोका जाता था तो पूरी जांच पड़ताल की जाती थी। कई बार वाहन चोर ट्रैफिक पुलिस के हत्थे चढ़ जाते थे, लेकिन फोटो चालान के बाद यह सब खत्म हो गया। अब जब फोटो चालान के बाद फर्जीवाड़े का पता लगता है तो पुलिस के पास चालान खत्म करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। टैÑफिक पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाता है। अभी तक ट्रैफिक पुलिस की ओर से कई प्रकरणों में जांच चल रही है लेकिन अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।

अभी तक ये नंबर किए गए चिह्नित
फोटो चालान होने के बाद नंबरों के फर्जीवाडेÞ में कई शिकायतें एसपी टैÑफिक के पास आई हैं। फतेहपुरसीकरी के कौरई निवासी गयाप्रसाद ने शिकायत की है कि उनकी यूपी 80 डीवी 6072 एक्टिवा सफेद रंग की है, जबकि घर पर आए चालान में एक्टिवा ग्रे की कलर की नजर आ रही है। इस बात यह सिद्ध हो रहा है कि गे्र एक्टिवा पर फर्जी नंबर डाल रखा है। ऐसे ही पथवारी के शिवम अग्रवाल, बालूगंज निवासी विवेक कुमार गुप्ता, डा. रजनीश अग्रवाल, यशपाल सिंह, शाहगंज के खेरिया मोड़ निवासी धर्मेंद्र सिंह, देवरी रोड निवासी उमेश अरोरा, विलासगंज निवासी आकाश वरुण, शाहगंज के आनंदपुरम निवासी मनीष आदि ने शिकायत की है कि उनकी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर पर कई गाड़ियां चल रही हैं, जो कि अवैध हैं। इस पर पुलिस जल्द कार्रवाई करे, लेकिन ट्रैफिक पुलिस इस मामले में हाथ पर हाथ रखकर बैठी हुई है।

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