आज की खबर आज
Agra

फल पिंडक का उपयोग चाइना भारत से भी ज्यादा कर रहा है

फल पिंडक का प्रयोग भारत से ज्यादा चाइना कर रहा है, जबकि यह भारत में पैदा होता है। विदेश में इसकी भी कीमत बहुत है। यह कहना था जम्मू विवि से आए प्रो. एके कौल का। मौका था आरबीएस कॉलेज में आयोजित प्रो. एसएन चतुर्वेदी की स्मृति व्याख्यानमाला का।
प्रो. एके कौल ने अपने उद्बोधन में बताया कि कश्मीर घाटी में पिंडक फल पाए जाते हैं। पिंडक मुख्यत: कीट के लारवा से क्रिया कर बनता है। आज-कल पिडंक मनुष्यों में साधक क्षमता को बढ़ाने के लिए दवाइयों में प्रयोग किया जा रहा है। भारत में इसका उपयोग कम हो रहा है। चाइना यहां से इसे खूब ले जा रहा है और उपयोग कर रहा है।
श्री कौल ने बताया कि इस कवक के बारे में प्रो. एसएन चतुर्वेदी ने 62 वर्ष पहले बताया था कि यह कवक सिर्फ कश्मीर घाटी में ही पाया जाता है, जो मनुष्यों के लिए बहुत उपयोगी है।
डॉ. आरएस पारीक ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रो. एसएन चर्तुेवदी से मैंने पौधों के औषधीय गुणों के बारे में कई बार चर्चा की थी जिसमें अमरबेल नामक पौधे के बारे में उन्होंने विस्तृत जानकारी दी थी। संयोजक डॉ. केपी सिंह ने कहा कि आरबीएस कॉलेज बॉटनी से संबंधित गोष्ठियों व संगोष्ठियों का आयोजन का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रति वर्ष देश के प्रसिद्ध वनस्पति शास्त्री एवं शोधकर्ता आते रहते हैं और आगरा व देश की अन्य समस्याओं पर मंथन होता रहता है।
कुलपति ग्रामोदय विद्याविद्यालय चित्रकूट प्रो. एनसी गौतम, प्रो. विजय पाल सिंह, प्रो. डीके माहेश्वरी, प्रो. शेशु लवानियां, डॉ. वरुण सरकार, हेमेंद्र चतुर्वेदी, पूर्व निदेशक डीईआई प्रो. एसएस भोजवानी आदि उपस्थित रहे। प्रो. एसपीएस चौहान ने संचालन किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *