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नकल माफिया विवि पर हावी

  • बगैर भौतिक सत्यापन किए बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर हो रही सामूहिक नकल
  • मुख्य कॉलेजों की इमारत की जगह दूसरी जगह परीक्षा करा रहे, नहीं है किसी का डर

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में नकल माफिया विवि प्रशासन पर हावी हो गया है। नकल कराने में कतई किसी का डर नहीं है। आलम यह हो गया है कि जिस इमारत को परीक्षा को केंद्र बनाया गया था, परीक्षा वहां न कराकर किसी दूसरी जगह पर कराई जा रही है। शुक्रवार को ऐसे ही दो कॉलेज औटा महामंत्री द्वारा पकड़े गए। इधर बताया जा रहा है कि कॉलेज संचालकों को पकड़े जाने के बाद भी डर नहीं है।
औटा महामंत्री डॉ. निशांत चौहान की टीम शुक्रवार को सुबह की पाली में बल्देव के भिक्खी सिंह प्रधान कॉलेज में गई। यहां बोर्ड लगा था बीएसपी कॉलेज का। कॉलेज पर ताला लटका था। टीम हैरान हो गई। डॉ. चौहान ने जानकारी की तो पता चला कि पेपर कॉलेज वाला कहीं दूसरी जगह पर करा रहा है। टीम पता करते हुए वहां तक पहुंच गई। यहां छात्र झुंड बनाकर परीक्षा दे रहे थे। हर छात्र के पास मॉडल पेपर था। कक्षा में किसी की डयूटी नहीं थी। परीक्षा का मखौल उड़ता देख डॉ. चौहान ने परीक्षा की वीडियो बना ली। इसके बाद वे आरबीएसएस कॉलेज में गए। यहां भी ताला लगा था। जानकारी की तो पता चला कि कहीं और पेपर हो रहा है। आधा किमी दूर जाकर दूसरी जगह पेपर हो रहा था। यहां भी सामूहिक नकल हो रही थी। औटा महामंत्री डॉ. निशांत चौहान ने सामूहिक नकल की रिपोर्ट दे दी है।
इधर महिला टीम ने श्री राम आदर्श महाविद्यालय में सामूहिक नकल पकड़ी। आज सुबह डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में टीम एमपीएस कॉलेज और श्रीराम आदर्श महाविद्यालय में गई।
कॉलेजों का अगर विवि ने केंद्र निर्धारण से पहले भौतिक सत्यापन कराया होता तो इस तरह नकल नहीं हो पाती। विवि ने फील गुड कर कई ऐसे केंद्र बना दिए, जो पैसे लेकर जमकर नकल करा रहे हैं। अब तो साफ कहा जा रहा है कि विवि ने ही नकल कराने को चॉबी दी है। औटा महामंत्री डॉ. निशांत चौहान का कहना है कि विवि की परीक्षाओं की बुरी स्थिति है। विवि प्रशासन इसके लिए जिम्मेदार है। औटा ने मांग भी की थी कि केंद्रों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, फिर भी नहीं कराया गया।

डॉ. गुप्ता की टीम को मिला नकल
पकड़ने का इनाम, आज नहीं भेजा
आगरा। डॉ. अनिल गुप्ता की टीम द्वारा अभी तक सबसे ज्यादा नकल पकड़ी गई है। आज उनकी टीम को नहीं भेजा गया है। बताया जा रहा है कि प्रो. सुगम आनंद ने आज उन्हें नहीं भेजा। प्रो. सुगम आनंद पर किसी अधिकारी का दबाव था कि उन्हें नकल पकड़ने न भेजा जाए, विवि की किरकिरी हो रही है, इसलिए डॉ. गुप्ता को रोक लिया गया। बीते वर्ष डॉ. लवकुश मिश्रा ने नकल पकड़ी थी तो उन्हें भी अगले दिन से नहीं भेजा था। विवि प्रशासन नहीं चाहता है कि नकल पकड़ी जाए। इससे साफ पता चलता कि वह कैसे कॉलेजों के लिए पचता है। प्रो. सुगम आनंद से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हुआ।

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