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जल संस्थान: रोक के बाद भी छुट्टी पर रहे अधिकारी!

  • बिल संशोधन को चक्कर लगाते रहे उपभोक्ता
  • टैक्स वसूली का प्रभावित रहा है कार्य, परेशानी

जल संस्थान में मनमानी का रिकॉर्ड बढ़ रहा है। एकमुश्त समाधान योजना लागू है। बकायेदारी का आंकड़ा बड़ा है तो उपभोक्ताओं की समस्याएं भी कम नहीं हैं। महाप्रबंधक ने इस महीने होली को छोड़कर अन्य दिनों में छुट्टियों पर रोक लगाई थी, लेकिन वे खुद ही कई दिनों की छुट्टी पर चले गये। ये सिलसिला यहीं नहीं रुका, जोन प्रथम के वसूली प्रभारी भी छुट्टी पर चले गये थे। इनके यहां न रहने से वसूली तो प्रभावित हुई और उपभोक्ताओं को भी खूब चक्कर लगाने पड़े। बिल संशोधन की समस्या से उपभोक्ताओं को निजात नहीं मिल पा रही है। इससे उन्हें बकायेदारी के बोझ से मुक्ति नहीं मिल पा रही है।
ज्ञातव्य है कि मेयर नवीन जैन ने शहर के उपभोक्ताओं को पानी और सीवर के टैक्स के बोझ को कम करने के लिए बीती आठ फरवरी को ओटीएस लागू की थी। उपभोक्ताओं की परेशानी और विभाग की कम वसूली को लेकर मेयर ने बाद में 28 फरवरी से अंतिम तारीख बढ़ाकर उसे 31 मार्च कर दिया। उन्होंने कहा था कि गलत बिलों में संशोधन करके उन्हें ठीक करके उपभोक्ताओं से बिल का भुगतान करवाएंगे। इससे उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
सूत्रों की मानें तो ओटीएस की तारीख बढ़ने के बाद महाप्रबंधक आरएस यादव ने 31 मार्च तक होली पर दो दिन की छुट्टी को छोड़कर अन्य दिनों में छुट्टियों पर रोक लगा दी थी ताकि टैक्स वसूली का कार्य प्रभावित न हो सके। विभाग में ये फरमान जारी हो गया। इसके बाद ही जोन प्रथम के प्रभारी वसूली व एई आरएस यादव छुट्टी पर चले गये। इसके बाद महाप्रबंधक भी छुट्टी पर चले गये। पार्षद रवि माथुर का कहना है कि अधिकारियों के छुट्टी पर रहने से उपभोक्ताओं के बिल संशोधन का कार्य प्रभावित रहा, इसलिए उपभोक्ता टैक्स जमा नहीं कर पाये। इसकी जानकारी मेयर और नगरायुक्त को दी गई। यदि जिम्मेदार अधिकारी यहां होते तो उपभोक्ताओं को यूं मायूस होकर न लौटना पड़ता। वैसे भी बिल बनाने में मनमानी की गई है।
बता दें कि महाप्रबंधक गुरुवार को और प्रभारी वसूली शुक्रवार को छुट्टी से लौटे हैं। उनकी छुट्टी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों में तो नाराजगी है, जिनकी छुट्टी पर जाने की प्लानिंग बेकार हो गई। वे तो भेदभाव करने के आरोप तक लगा रहे हैं।

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