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नगर निगम के सीएफओ बोले, गलत कर रहा है जल संस्थान

  • जल संस्थान को नगर निगम ने पिछले साल भेजा था पत्र
  • फाइनल एआरवी से टैक्स का बिल बनाने के लिए कहा
  • नगर निगम के टैक्स नियम को फॉलो करे जल संस्थान

योगी सरकार कितनी भी सख्ती क्यों न कर ले, लेकिन यहां जल संस्थान के अधिकारियों की मनमानी पर कोई फर्क नहीं पड़ता। वे तो अपनी चाल ही चलते हैं। तभी तो नगर निगम के नियम और नगरायुक्त के निर्देश का पालन नहीं हो रहा है। अधिकारियों की मनमानी शहर के 1.30 लाख उपभोक्ताओं पर बकायेदारी का बोझ बढ़ा रही है, जिससे मुक्ति दिलवाने में ओटीएस (एकमुश्त समाधान योजना) भी काम नहीं आ रही है। एआरवी और फाइनल एआरवी के चक्कर में सही मायने में आम उपभोक्ता इसके लाभ से दूर हैं। सवाल उठता है कब तक उपभोक्ताओं का जल संस्थान शोषण करता रहेगा? इस दोहरी एआरवी के चक्कर से कब मुक्ति मिलेगी?
नगर निगम के मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी (सीएफओ) पवन कुमार की मानें तो जल संस्थान पानी और सीवर का टैक्स लेने के लिए नगर निगम के नियमों से बंधा है। हाउस टैक्स के बिल पर भवन की दो वार्षिक मूल्यांकन (एआरवी) अंकित रहता है। पहला एआरवी और दूसरा फाइनल एआरवी। नगर निगम अपना हाउस टैक्स फाइनल एआरवी से वसूलता है। ये फाइनल एआरवी छूट वाली होती है। इससे उपभोक्ता पर बिल का भार कम हो जाता है। इसी फाइनल एआरवी से जल संस्थान को अपना पानी-सीवर का टैक्स लेना चाहिए।
ज्ञातव्य है कि नगरायुक्त अरुण प्रकाश भी कह चुके हैं कि जल संस्थान अपना टैक्स नगर निगम के नियमानुसार ही ले। इससे उपभोक्ता पर टैक्स का बोझ न बढ़े और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। ओटीएस का लाभ इसलिए दिया जा रहा है कि उपभोक्ता बकायेदारी के बोझ से मुक्त हो सकें। बता दें कि नगरायुक्त, पार्षद और सीएफओ कह रहे हैं कि जल संस्थान एआरवी से बिल बनाकर गलत कर रहा है फिर भी जल संस्थान के अधिकारी उसे सुधारने की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। मेयर नवीन जैन ने ओटीएस की तारीख बढ़ाई, जिससे अधिक से अधिक उपभोक्ता ओटीएस का लाभ उठा सकें। जानकारों का मानना है कि जिस तरह से जल संस्थान के अधिकारी मनमानी पर अड़े हैं इससे तो हजारों उपभोक्ताओं की ये समस्या नासूर बन जाएगी। इस बकायेदारी के बोझ से उन्हें मुक्ति नहीं मिल पाएगी।

  • नगर निगम जिस फाइनल एआरवी से हाउस टैक्स लेता है, उसी से जल संस्थान को अपना टैक्स लेना चाहिए। नियम तो यही है। इसके लिए निगम की तरफ से पिछले साल एक पत्र भी जारी किया गया था। यदि एआरवी से पानी और सीवर टैक्स लिया जा रहा है तो वो गलत है। जल संस्थान के अधिकारियों को ऐसा नहीं करना चाहिए, जिससे उपभोक्ताओं के लिए परेशानी खड़ी हो जाये।
    पवन कुमार, सीएफओ, नगर निगम
  • एआरवी और फाइनल एआरवी की समस्या का समाधान अगले वित्तीय वर्ष अप्रैल से किया जाएगा। उपभोक्ता अभी ओटीएस का लाभ लेने के लिए बिल का भुगतान करें। पिछले साल क्या हुआ वो मेरे समय का नहीं है। वैसे सभी जोन में एक समान ही बिल का मानक होना चाहिए।
    आरएस यादव, महाप्रबंधक, जल संस्थान
  • शहर के उपभोक्ताओं के साथ जल संस्थान टैक्स के नाम पर सरासर लूट कर रहा है। अधिकारियों की मनमानी की पराकाष्ठा है। नगरायुक्त, पार्षद, उपभोक्ता और सामाजिक संगठनों की कोई बात नहीं सुनी जा रही है। अधिकारियों ने तो उपभोक्ताओं का शोषण करने का मूड जो बना लिया है। ग्राहक पंचायत समाधान होने तक अपना संषर्घ जारी रखेगी।
    मुरारीलाल गोयल, जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत

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