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जेलों में मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन

प्रदेश के कारागारों में पांच वर्षों में 1848 कैदियों की मौतें
कारागारों की वास्तविक क्षमता से कई गुना अधिक कैदी
कैदियों को मजदूरी में दिया जाता है नाममात्र की धनराशि
स्वीकृत पदों के मुकाबले कर्मचारियों की संख्या भी कम

आगरा। प्रदेश के कारागारों में मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन हो रहा है। कैदियों की रहने की वास्तविक क्षमता से कई गुने कैदी रहने को मजबूर हैं। कारागारों में काम के बदले भी कैदियों को नाममात्र की राशि दी जाती है। वर्ष 2013 से 2017 के बीच पांच वर्षों में 1800 से ज्यादा कैदियों की मौत हो गयी। कारागारों में कर्मचारियों व अधिकारियों की संख्या स्वीकृत पदों के मुकाबले बहुत कम है। यह जानकारी कार्यालय प्रशासन एवं सुधार सेवायें विभाग के मुख्यालय द्वारा जनसूचनाधिकार के तहत दी गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता व आरटीआई एक्टिविस्ट केसी जैन के आवेदन पर उपलब्ध करायी गयी सूचना में कहा गया है कि वर्ष 2013 से 2017 के बीच 1848 कैदियों की मृत्यु हो गयी, जिनकी वर्षवार संख्या क्रमश: 357, 337, 346, 409 व 399 थी। प्रदेश में इन पांच वर्षों में जिला कारागार बरेली में सबसे अधिक में मौतों हुई इनकी संख्या 119 थी, जबकि जिला कारागार फतेहपुर में 113 कैदियों की मृत्यु हुई। इतनी बड़ी संख्या में जो मौतें मानवाधिकार व कारागारों की व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है।
प्रदेश के 62 कारागारों की कैदियों को रखने की वास्तविक क्षमता 13 दिसम्बर 2017 तक 58,400 थी, जबकि उस दिन इन कारागारों में 96,383 कैदी थे जो वास्तविक क्षमता के सापेक्ष में 1.65 गुने थे। मथुरा के कारागार में वास्तविक क्षमता से तीन गुने कैदी थे। आगरा के केंद्रीय कारागर में क्षमता से 2.73 गुने अधिक कैदी थे। यहां 1015 की क्षमता के सापेक्ष 2770 कैदी थे।
कारागारों में कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल श्रम के बदले देय मजदूरी क्रमश: 40, 30 व 25 रुपये प्रतिबन्दी प्रतिदिन भुगतान किया जाता है। जबकि प्रदेश में कुशल, अर्द्धकुशल व अकुशल कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी कानून के अंतर्गत देय राशि क्रमश: 363.75, 324.73 व 295.21 रुपये निर्धारित है। यह भी मानवाधिकार का उल्लंघन है।
एक और महत्वपूर्ण सूचना में बताया गया कि 73 कारागारों के लिए चिकित्सा अधिकारी के 145 पद हैं, जिनमें 30.9.2018 को 110 पद भरे थे और 35 पद रिक्त। इसी प्रकार फार्मासिस्ट के 141 पदों के विरुद्ध 73 पद
1.1.2018 को रिक्त थे और केवल 68 ही भरे हुए थे। एक्स.रे टेक्नीशियन के 29 पदों के विरुद्ध 27 पद रिक्त थे और केवल 2 पद ही भरे थे। इस स्थिति में कैदियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सुविधाओं की कमी होना स्वाभाविक है।
जैन ने इन सूचनाओं के आधार पर प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री से कारागारों की स्थिति में सुधार के लिए गुहार लगाई है। उनका कहना है कि कारागारों का उद्देश्य सजा के दौरान कैदियों को सुधार का मौका देना है ताकि वे समाज की मुख्य धारा में सजा की अवधि के बाद जुड़ सकें।

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